सोलर पैनल क्या है? Types Of Solar Panel in Hindi

हेलो दोस्तों आज हम आपको सोलर पैनल क्या है? Solar Panels को कैसे बनाया जाता है? से जुड़ी पूरी जानकारी अपनी इस आर्टिकल में देंगे। सोलर पैनल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘One Sun One World One Grid’ की बात कही जो कि सौर ऊर्जा को भारत में बढ़ावा देने की एक नई पहल है और इसके अलावा प्रधानमंत्री ने World Solar Bank बनाने की बात भी कह दी है।

इसलिए आपका Solar Panel के बारे में जानना बहुत जरूरी है। यह Electricity का सबसे अच्छा साधन है। जो कि काफी समय तक चलता है। आने वाले कुछ समय में इसकी मांग और इसका उपयोग काफी ज्यादा होगा। अधिकतर लोग सोलर पैनल का उपयोग अब घरों में भी करने लग गये हैं। सोलर पैनलस लगाने पर आम बिजली की तुलना में कम बिजली खर्च होती है।

सोलर पैनल क्या है? What is Solar Panel in Hindi

सोलर पैनल क्या है?

सोलर पैनल यानी कि सौर ऊर्जा सूर्य से प्राप्त प्रकाश के द्वारा सोलर पैनल से बिजली उत्पन्न की जाती है। सोलर पैनल में बहुत ही छोटे-छोटे Solar Cell होते हैं। जो कि सूर्य के प्रकाश पड़ने पर बिजली उत्पन्न करते हैं। सूर्य की ऊष्मा को सोलर पैनल विद्युत ऊर्जा में बदल देता है। जिससे बिजली उत्पन्न होती है और हम उस विद्युत को अपने घर,खेतों,कार्यालयों में उपयोग कर सकते हैं।

आपने ISS (International Space Station) के बारे में तो सुना ही होगा। जो अंतरिक्ष की एक Satellite है। यह कई देशों को अंतरिक्ष से संबंधित जरूरी सूचनाओं को प्रदान करता है। इसमें लगे सोलर पैनल ही International Space Station को बिजली प्रदान करते हैं। अंतरिक्ष में सूर्य कभी भी नहीं छिपता। इसलिए Solar Panel पर हमेशा सूर्य की रोशनी पढ़ती रहती है। जिससे Space Station की बिजली की जरूरत पूरी होती है और यह सोलर पैनल इतने बड़े हैं कि वह पूरे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की बिजली प्रदान करते हैं

Solar Panel को कैसे बनाया जाता है? How To Make Solar Panel

सोलर सेल बनाने के लिए सिलिकॉन की जरूरत पड़ती है। सिलिकॉन हमें आसानी से रेत (सिलिकॉन ऑक्साइड) को कार्बन के साथ 2000° सेल्सियस तापमान पर गर्म करने पर मिल जाता है। जिससे हम आसानी से रेत में से सिलिकॉन को निकाल लेते हैं।अब हम आपको Solar Panel Manufacturing Process बताएंगे कि सोलर पैनल को कैसे बनाया जाता है।

लेजर मशीन द्वारा सेल काटना

सोलर पैनल बनाने की प्रक्रिया सबसे पहले सेल की कटिंग के साथ शुरू होती है। जिसे लेजर से काटा जाता है। छोटे मॉडल मे लेज़र के साथ Cell Cutting की जाती है।

स्ट्रिंगर मशीन में सेल वेल्डिंग

सेल की कटिंग करने के बाद अब हमारी अगली प्रक्रिया stringe बनाने की होती है। Automatic Stringer Machine के साथ 30mm के ऊपर का कट सेल और फूल सेल तैयार कर सकते हैं। cut cell तैयार होने के बाद +,- सीरीज में जुड़ेगा। दोस्तों जो सोलर पैनल का नीले रंग का भाग होता है। वह (-) नेगेटिव भाग होता है और Bottom का सफेद भाग (+) पॉजिटिव भाग होता है।

दृश्य निरीक्षण (Visual Inspection)

Stringe पूरा होने के बाद सेल को आगे की प्रक्रिया के लिए भेज दिया जाता है। जहां सेल का विजुअल इंस्पेक्शन होता है। जिस भी स्ट्रिंग में कोई खराबी आती है तो उसे अलग कर दिया जाता है। इसके बाद connection की Soldering की जाती है। उसके बाद जो अतिरिक्त Material होता है। उसे काटकर अलग कर दिया जाता है।

मॉड्यूल कनेक्शन इन्सुलेट करें

कनेक्शन की सोल्डरिंग होने के बाद अगली प्रक्रिया के लिए क्रीम को भेजा जाता है। आप सोलर पैनल के कनेक्शन को Insulate किया जाता है। इसमें बेडशीट और E.V का प्रयोग किया जाता है। जिससे सोलर पैनल धूल और नमी से बचा रहे।

दर्पण अवलोकन (Mirror Observation)

इस प्रक्रिया में अब बने हुए मॉड्यूल को चेक किया जाता है कि कहीं मॉड्यूल में कोई विजुअल इफेक्ट तो नहीं इसमें धूल के कण तो नहीं यह सब चेक करने के बाद अगली प्रक्रिया शुरू होती है।

ईएल परीक्षण (EL Testing)

इसमें मॉड्यूल का EL Test टेस्ट करते हैं। इसमें जो मॉड्यूल होता है। उसकी EL Testing इमेज मिलती है। जिसमें माइक्रो क्रैक,डेडसेल,Low Power Cell को डिटेक्ट किया जाता है। अगर इनमें से कुछ समस्या मॉड्यूल में आती है तो इसे सबसे पहले रिपेयर किया जाता है।

लेमिनेशन प्रक्रिया (Lamination Process)

अब मॉड्यूल को लेमिनेशन प्रक्रिया के द्वारा 140 डिग्री पर लैमिनेट किया जाता है। लैमिनेट के बाद मॉड्यूल वाटरप्रूफ धूल कणों से मुक्त होता है और अत्यधिक गर्म होने पर इसे 5 से 10 मिनट के लिए ठंडा होने के लिए रख दिया जाता है।

ट्रिमिंग प्रक्रिया (Trimming Process)

इस प्रक्रिया में मॉड्यूल के अतिरिक्त मेटेरियल को अलग कर दिया जाता है।

फ्रेम काटना (Frame Cutting)

इसके बाद मॉड्यूल को छोटेबड़े फ्रेम में काटा जाता है। Frame Cutting Machine के द्वारा यह काम किया जाता है।

फ़्रेमिंग,गोंद,जंक्शन बॉक्स (Framing,Glue,Junction Box)

ग्लू लगाकर सीलेन को मॉड्यूल से अटैच किया जाता है। अटैच होने के बाद मॉड्यूल को फ्रेमिंग मशीन में रखकर दबाया जाता है।जिससे Solar Panel से अच्छी तरह से जुड़ जाता है। इसके बाद सोलर पैनल में Junction Box को लगाया जाता है तथा उसके बाद कनेक्शन की Soldering की जाती है। इसके बाद सोलर पैनल को 10 से 12 घंटे तक सूखने के लिए रख दिया जाता है।

मॉड्यूल सफाई (Module Cleaning)

इसके बाद तैयार सोलर पैनल को अच्छे से साफ किया जाता है ताकि इस पर से धूल कण को अच्छे से साफ किया जा सके।

सोलर पैनल कितने प्रकार के होते हैं? Types Of Solar Panel in Hindi

Types Of Solar Panel in Hindi

सोलर पैनल तीन प्रकार के होते हैं-

  1. पहला – Monocrystalline
  2. दूसरा – Polycrystalline
  3. तीसरा– Thinfilm

इसमे Monocrystalline और Polycrystalline का ही सबसे ज्यादा उपयोग किया जाता है। Thinfilm अत्यधिक पतला होता है। इसी कारण इसका उपयोग लगभग ना के बराबर ही होता है। तो चलिए अब Monocrystalline और Polycrystalline के बारे में थोड़ा जान लेते हैं।

Monocrystalline

  • यह काले रंग का होता है।
  • यह ज्यादा बढ़िया होता है।
  • यह कम रोशनी में भी काम करता है।
  • अगर आपके प्रदेश में बादल भी कम है तो भी यह काम करता है।
  • अगर आप ठंडे प्रदेशों जहां धूप बहुत कम आती है तो आपको Monocrystalline solar panels लगवानी चाहिए।
  • यह वोल्टेज ज्यादा देता है
  • इसकी लाइफ भी ज्यादा होती है
  • इसकी कीमत भी ज्यादा होती है।
  • गवर्नमेंट मोनोकरीसटलाईन सोलर पैनल को लगवाती है ताकि बारबार होने वाले खर्चों से बचा जा सके।

Polycrystalline

  • यह नीले रंग का होता है।
  • यह कम बढ़िया होता है।
  • इसको ज्यादा रोशनी की जरूरत होती है।
  • कड़ी धूप वाले इलाकों में काम करता है।
  • अगर आप राजस्थान,जयपुर जैसे इलाकों में है तो आपको यह सोलर पैनल लगवानी चाहिए
  • यह वोल्टेज कम देता है
  • इसकी लाइफ भी कम होती है
  • इसकी कीमत भी कम होती है
  • खेतों घरों कार्यालयों में लोग इसे लगवाते हैं।

Solar Panel के क्या फायदे हैं?

  1. सोलर पैनल से उत्पन्न बिजली को आप बेच भी सकते हो इससे आपकी कमाई भी हो जाएगी।
  2. सोलर पैनल लगवाने पर आप अपने हजारों रुपए के आने वाले बिजली बिल से छुटकारा पा सकते हो।
  3. सोलर पैनल से पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं है। क्योंकि इसमें से 0% कार्बन निकलता है इसलिए इसे ग्रीन एनर्जी भी कहते हैं
  4. एक बार इन्वेस्ट करने पर यह आपका मुफ्त बिजली का स्त्रोत बनेगा।
  5. इसकी उम्र भी ज्यादा होती है। एक बार इन्वेस्ट करने पर यह 20 से 25 साल तक चलता है।
  6. अपने शहर गांव में बिजली होने पर भी आप सोलर ऊर्जा का उपयोग कर सकोगे। सोलर पैनल का उपयोग हम हिल स्टेशन में भी कर सकते हैं।
  7. सोलर सिस्टम पर गवर्नमेंट सब्सिडी भी देती है।
  8. सोलर पैनल का उपयोग कर हम लिमिटेड प्राकृतिक चीजों जैसे कि कोयला,विधुत,जल पेट्रोल आदि को बचा सकते हैं।
  9. सौर ऊर्जा अर्थात सोलर पैनल दूसरी विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करने वाले उपकरणों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित है।

निष्कर्ष

तो दोस्तों आज आपने सोलर पैनल क्या है? Types Of Solar Panel in Hindi सोलर पैनल कितने प्रकार के होते हैं। सोलर पैनल के क्या फायदे हैं के बारे में जाना हमें आशा है कि आपको पूरी जानकारी समझ में चुकी होगी। अगर आपको हमारी यह पोस्ट पसंद आई। तो आप हमें अपने सुझाव कमेंट करके जरूर बताएं। आपके दिए गए सुझाव हमें भविष्य में आपके लिए ओर बेहतर पोस्ट लिखने के लिए प्रेरित करेंगे।

मेरा नाम Abhishek है। इस ब्लॉग का संस्थापक और लेखक हूं। मै Yoabby.com पर सभी आर्टिकल को हिंदी भाषा में लिखता हूं। मुझे लिखने का बहुत पहले से ही शौक था। ब्लॉगिंग के द्वारा मैं अपने शौक को भी पूरा कर रहा हूं। और साथ ही YoAbby.com पर आए लोगों को टेक्नोलॉजी के बारे में हिंदी भाषा में आर्टिकल उपलब्ध करवा रहा हूं।

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