Blockchain क्या है? ब्लॉकचेन के प्रकार,लाभ,अनुप्रयोग हिंदी में

हैलो दोस्तों,आज हम इस आर्टिकल में Blockchain के बारे में जानेंगे। कि Blockchain क्या है? पिछले कई सालों से इंटरनेट पर ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी खूब चर्चा में है। बता दें कि टेक्नोलॉजी क्षेत्र में Blockchain की मांग सबसे ज्यादा है।

कई विकसित देशों जैसे कि Malta, Estonia, Switzerland, UAE, Singapore ने ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का उपयोग Health, Education, Retail, Government जैसे कार्यों में करना शुरू कर दिया है। विश्व भर में यही देश ब्लॉकचेन टेक्नॉलजी में प्रमुख है।

विश्व का हर विकसित देश ब्लॉकचेन रिसर्च और डेवलपमेंट में लाखों करोड़ों डॉलर निवेश कर रहा है। इंडिया में भी आने वाले कुछ वर्षों में “डिजिटल करेंसी” लाई जाएगी। जो कि Blockchain पर ही आधारित होगी।

शोधकर्ताओं का मानना है कि विश्व में ब्लॉकचेन इंडस्ट्री वर्ष 2030 तक 85.9% (CGPR) की दर से बढ़ेगी। जिससे यह अनुमान लगाया जा सकता है की ब्लॉकचेन का भविष्य में कितना ज्यादा उपयोग होगा।

Blockchain की मांग Microsoft, Google, Accenture, IBM जैसी बड़ी कंपनीयों में सबसे ज्यादा है। बिटकॉइन, इथेरियम जैसी क्रिप्टोकरंसी में ब्लॉकचेन नेटवर्क के प्रयोग से यह हमेशा चर्चा का विषय बना रहेगा।

तो चलिए Blockchain Technology क्या हैं? और इससे जुड़ी तमाम जानकारी ब्लॉकचेन तकनीक के प्रकार, अनुप्रयोग, फायदे सभी चीजों को अच्छे से जानते हैं। ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी को अच्छी तरह समझने के लिए आर्टिकल को ध्यानपूर्वक अंत तक पढ़े।

विषय सूची :-

Blockchain क्या हैं?

Blockchain क्या हैं

Blockchain ऐसी तकनीक है। जिसके उपयोग से बिना किसी गवर्नमेंट या बैंक के बिना लेन-देन किया जा सकता है। यानी कि ब्लॉकचेन एक Decentralized ledger सिस्टम है। इसके Transactions में कोई भी छेड़खानी नहीं कर सकता। जिस वजह से यह काफी ज्यादा सुरक्षित है। ब्लॉकचेन तकनीक को विश्वसनीय और सुरक्षित बनाने में Smart Contracts और Consensus Methods का उपयोग किया गया है।

ब्लॉकचेन में जब भी किसी Data को डाला जाता है। तो इसमें ब्लॉकचेन नेटवर्क से जुड़े कंप्यूटर्स ब्लॉक बनाना शुरू करते हैं। जिसमें Hash Block बनते हैं। यह एक कंप्यूटेशनल एल्गोरिदम पर काम करता है। ब्लॉकचेन में डाले गए डाटा को कोई भी माइनर या गवर्नमेंट, बैंक बदल या मिटा नहीं सकता।

ब्लॉकचेन में जब भी कोई हैश ब्लॉक बनता है। उस हर ब्लॉक का अपना एक यूनीक कोड होता है। सबसे पहले बनने वाला Block आगे ब्लॉक्स के साथ जुड़ता जाएगा। इस तरह यह ब्लॉक्स की चेन बनती है।

अगर कोई एक ब्लॉक में मोजूद डेटा को मिटाने की कोशिश करता है तो बाकी के सभी ब्लॉक में मौजूद जानकारी invalid हो जाएगी। जिससे ब्लॉक्स की चेन टूट जाएगी नया ब्लॉक नहीं बनेगा।

Blockchain में Consensus तरीके का उपयोग होने की वजह से ब्लॉकचेन नेटवर्क को संकेत चला जाता है। कि कोई ब्लॉक्स में गड़बड़ी कर रहा है जिसके कारण आप ब्लॉक्स की चेन नहीं बना पाओगे। Blockchain Network में मौजूद कंप्यूटर्स “ब्लॉक के चैन” को अस्वीकार कर देंगे।

ब्लॉकचेन में Smart Contracts क्या हैं?

स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट एक प्रोग्रामिंग कॉन्ट्रैक्ट है। जिसमें सभी नियम और शर्तें कोडिंग के रूप में लिखी जाती हैं। इस कॉन्ट्रैक्ट से दो व्यक्ति बिना एक दूसरे को जाने लेन-देन कर सकते हैं। साथ ही इसमें किसी थर्ड पार्टी की कोई भागीदारी नहीं होती। जिस कारण smart Contracts विश्वसनीय होते है।

Blockchain network में ट्रांजैक्शन वेरीफाई और पूरा होने पर Smart Contracts ऑटोमेटिक नोटिफिकेशन भेज देता है। स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट उसी तरह काम करेगा। जो डेवलपर्स के द्वारा नियम और शर्तें उसमे Encrypt की जाती है।

उदाहरण: किसी शॉपिंग साइट से हम प्रोडक्ट को खरीद लेते हैं और डिजिटल पेमेंट करते हैं। अब इसके बाद वह वेबसाइट हमें अपने प्रोडक्ट सम्ब्न्धी डिलीवरी टाइम, कीमत सभी चीजें दिखा देती है।

अब यहां पर स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट का ही उपयोग है। जिसमें जब तक प्रोडक्ट आप तक नहीं पहुंचता। तब तक आपका लेनदेन पूरा नहीं होगा। saler और buyer एक दूसरे को नहीं जानते। Smart Contracts में सभी कार्य ऑटोमेटिक होते हैं।

ब्लॉकचेन में Consensus Algorithm क्या हैं?

Consensus का हिंदी मतलब ‘आम सहमति’ है। Consensus Algorithm का उपयोग ब्लॉकचेन में सुरक्षा बनाए रखने के लिए किया गया है। हालांकि ब्लॉकचेन Decenterlized Ledger System है। परंतु अगर आप इसमें एक नया ब्लॉक बनाते हैं।

तो आपको उस ब्लॉक को ब्लॉकचेन नेटवर्क में उपयुक्त बाकी कंप्यूटर के साथ साझा करना होगा। आम सहमति बनानी होगी। ब्लॉकचेन नेटवर्क में अगर वह ब्लॉक असुरक्षित सिद्द हुआ तो कंप्यूटर्स उस ब्लॉक को नेटवर्क में नहीं जोड़ेंगे। जिससे नया ब्लॉक नहीं बनेगा।

Consensus Algorithm कई प्रकार के होते हैं। ब्लॉकचेन की सुरक्षा में इसके तीन प्रकार उपयोग किए जाते हैं। जिसके बाद ही नया ब्लॉक बनाने की परमिशन कंप्यूटर्स देते हैं।

1. Proof of Work (PoW)

बिटकॉइन ब्लॉकचेन में Proof Of Work का सबसे ज्यादा उपयोग है। साथ ही बाकी के Consensus Algorithm में PoW सबसे ज्यादा मशहूर एल्गोरिदम है। इस एल्गोरिदम में माइनर्स जटिल मैथमेटिकल puzzle को हल करके ब्लॉक बनाकर उसे Blockchain में जोड़ देते हैं और इनाम पाते हैं।

यानी Miners को ब्लॉक बनाने और उसे Validate करने में कितना समय लगा। इसका प्रमाण Blockchain Network को देना होगा। इसी वजह से इसे “प्रूफ ऑफ वर्क” एल्गोरिदम कहते हैं। Proof Of Work में बिजली की खपत सबसे ज्यादा होती है।

2. Proof of Stake (PoS)

Proof of Stake एल्गोरिदम में Validator transactions को Validate करते हैं। इसमें ट्रांजैक्शन को वैलिडेट करने के लिए ब्लॉकचेन नेटवर्क के सभी कंप्यूटर कार्य करते हैं। परंतु सिर्फ एक Validator ही ट्रांजैक्शन सत्यापित कर पाता है। Transactions वैलिडेट करने पर Reward मिलता है।

उस Reward के मिलने तक वैलिडेटर को कुछ Coins Stake के तौर पर रखने होते हैं। अगर वैलिडेटर ऐसे ट्रांजैक्शन को validate कर देता है। जो असुरक्षित है। तो जो Coins stake के तौर पर रखे गए थे। वह deduct कर लिए जाते हैं और इनाम भी नहीं मिलते। इसलिए इसे Proof of Stake (poS) यानी ‘हिस्सेदारी का सबूत’ कहा जाता है।

3. Delegated Proof of stake (DpoS)

इस एल्गोरिदम में सबसे ज्यादा Coins Holders किसी एक चयनित वैलिडेटर को ब्लॉकचेन में ट्रांजैक्शन वैलिडेट करने हेतु चुनते हैं। जिस माइनर को सबसे ज्यादा वोट मिलेंगे वही ज्यादा ब्लॉक्स बनाएंगे और इनाम प्राप्त करेगा।

Delegated Proof of Stake एल्गोरिदम प्रूफ ऑफ वर्क (PoW) के मुकाबले अधिक कुशल है। इसमें बिजली की खपत सबसे कम होती है। साथ ही इस एल्गोरिदम को प्रूफ ऑफ वर्क (PoW) और प्रूफ ऑफिस स्टेक (PoS) को मिलाकर बनाया गया था।

ब्लॉकचेन का इतिहास ( Blockchain History in Hindi)

ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी को बनाने का पहला श्रेय Stuart Haber और Scott Stornetta नामक व्यक्तियों को जाता है। यह पेशे से क्रिप्टोग्राफर और कंप्यूटर साइंटिस्ट है। वर्ष 1991 से ब्लॉकचेन को बेहतर बनाने में इन्होंने काम शुरू किया।

  1. वर्ष 2009 से विश्व में क्रिप्टोकरेन्सी प्रचलित हुई। जिसे सतोशी नाकामोतो नामक व्यक्ति ने ब्लॉकचेन पद्धति को उपयोग कर बनाया था। उस क्रिप्टोकरंसी का नाम बिटकॉइन है।
  2. वर्ष 2010 में बिटकॉइन को jeremy sturdivant नामक व्यक्ति ने 10,000 बिटकॉइन के बदले दो पिज्जा को खरीदा। उस समय पिज्जा की कीमत मात्र $40 थी।
  3. वर्ष 2012 से बिटकॉइन ट्रांजैक्शन को शुरू किया गया।
  4. वर्ष 2013 तक बिटकॉइन ब्लॉकचेन में काफी उछाल देखा गया। जिससे इसकी वैल्यू 1 बिलियन डॉलर पार कर चुकी थी। इसी समय ही Ethereum Cryptocurrency के संस्थापक Vitalik Buterin ने इथेरियम ब्लॉकचेन पर काम करना शुरू कर दिया था।
  5. वर्ष 2014 में ब्लॉकचेन तकनीक के लिए फंड इकट्ठा किया गया। जिसमें 40 बड़ी कंपनियां शामिल थी। इन कंपनियों ने r3 सॉफ्टवेयर के द्वारा एक संग बनाया। जिससे ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी को सुरक्षित लेनदेन हेतु बेहतर बनाया गया। इसी वर्ष Ethereum Blockhain को भी Crowdsale Contract के जरिए फंड दिया गया।
  6. वर्ष 2015 में Linux के द्वारा ब्लॉकचेन के विकास के लिए Open Source Project Hyperledger को ब्लॉकचेन में जोड़ा। इसी वर्ष इथेरियम ब्लॉकचेन का पहला Gensis Block ब्लॉकचेन बना लिया गया था।
  7. वर्ष 2016-17 में Blockchain में EOS (Electro-Optical System) को जोड़ा गया। जो कि ब्लॉकचेन Decenterlized एप्लीकेशन बनाने में माहिर थे।
  8. वर्ष 2018 में ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी को अलग-अलग एप्लीकेशन में उपयोग के लिए बना दिया गया। जिसमें आज इस Technology को क्रिप्टोकरंसी, हेल्थ, गवर्नमेंट, रिटेल जैसे कार्यों में उपयोग कर सकते हैं। जिससे ब्लॉकचेन तकनीक का भविष्य में सबसे ज्यादा उपयोग होने का अनुमान है।

Blockchain Technology कैसे काम करती हैं?

Blockchain Technology कैसे काम करती हैं?

ब्लॉकचेन एक Decentralized ledger (बहिखाता) System है। Ledger में ब्लॉक्स की चैन बनती है। हर एक ब्लॉक में ट्रांजैक्शन संबंधित Data और Hash होता है। जो आगे हर एक नए ब्लॉक को बनाते हैं। जिससे ब्लॉक्स की चैन बनती जाती है। जिनको मिटाना और छेड़खानी करना नामुमकिन है।

आइए अब जानते हैं- Blockchain कैसे काम करता है?

  1. सबसे पहले यूज़र ट्रांजैक्शन करने के लिए लेजर सिस्टम को अनुरोध भेजता है।
  2. लेजर में रिकॉर्ड को ब्लॉक के रूप में प्रदर्शित किया जाता है। जिसमें ट्रांजैक्शन की सारी जानकारी और लेजर को सुरक्षित रखने के लिए Hash होते हैं।
  3. अब उस ब्लॉक को Blockchain Network के सभी कंप्यूटर्स तक भेज दिया जाता है।
  4. कंप्यूटर्स ब्लॉक में मौजूद Data और hash को वैलिडेट करना शुरू करते हैं।
  5. कंप्यूटर्स जटिल मैथमेटिकल Puzzle को हल कर ब्लॉक Validation स्वीकार करते हैं।
  6. अब उस ब्लाक को ब्लॉकचेन में जोड़ लिया जाता है।
  7. Transaction को Verify कर लिया जाता है।
  8. अब कंप्यूटर्स को ब्लॉक बनाने के लिए coins इनाम के तौर पर वितरित किए जाते हैं।

Blockchains कितने प्रकार के होते हैं?- Types of Blockchain In Hindi

अलग-अलग तरह के लेनदेन और कार्यों में क़ई अलग प्रकार के Blockchains का प्रयोग होता है। वह ब्लॉकचेन के प्रकार कौन से है। चलिए जानते हैं।

1. Public Blockchains

पब्लिक ब्लॉकचेन में सभी ज्वाइन कर सकते हैं सभी माइनर्स Public Blockchain को आसानी से ज्वाइन कर सकते हैं। साथ ही यह काफी सुरक्षित होते है। इस इथेरियम ब्लॉकचेन जैसी क्रिप्टोकरंसी इसी ब्लॉकचेन का हिस्सा है।

2. Private Blockchains

प्राइवेट ब्लॉकचेन को किसी एक संस्था (organisation) के द्वारा मैनेज किया जाता है। इसमें सभी Miners ज्वाइन नहीं कर सकते। संस्था खुद अपने माइनर्स को चयनित करती है। ऐसे ब्लॉकचेन Business में काम आते हैं। एक ही ऑर्गेनाइजेशन के द्वारा Network को मैनेज किया जाता है। Blockchain Exchange Network Ripple और Hyperledger प्राइवेट ब्लॉकचेन के उदाहरण हैं।

3. Consortium Blockchains

यह ऐसा ब्लॉकचेन है। जिसे एक बड़े समूह के द्वारा नियंत्रित किया जाता है। जिसकी वजह से Consortium Blockchain सबसे ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। इसमें बड़ी-बड़ी कंपनियां मिलकर ब्लॉकचेन नेटवर्क को अलग-अलग कार्यों के लिए बेहतर बनाने पर काम करती है।

4. Hybrid Blockchains

हाइब्रिड ब्लॉकचेन में पब्लिक और प्राइवेट ब्लॉकचेन का उपयोग होता है। यानी कि इसे एक ही संस्था मैनेज करती है।परंतु इसमें कुछ ट्रांजैक्शन को वैलिडेट करने के लिए पब्लिक ब्लॉकचेन को भी परफॉर्म किया जाता है।

ब्लॉकचेन के अनुप्रयोग- Applications of Blockchains in Hindi

ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग कर हर सिस्टम को भ्रष्टाचार मुक्त और सुरक्षित बनाया जा सकता है। साथ ही आपके Data को कोई नुकसान न पहुंचाए। ऐसा विश्वास यह सिस्टम देता है। चलिए जानते हैं कैसे Blockchains का उपयोग कहां और कैसे किया जा सकता है?

1. Government

ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग कर लोगों की जानकारी को सुरक्षित रखा जाएगा। इस तकनीक से देश के हर व्यक्ति की निजी जानकारी को Manage किया जा सकता है। जिससे अपराधी गतिविधियों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। साथ ही अगर Blockchain और Biometrics को जोड़ दिया जाए। एक बेहतर सुरक्षा प्रणाली बनाई जा सकती है।जिससे यूजर डाटा को कोई भी छेड़ या मिटा नहीं सकता।

2. Retail

रिटेल बिजनेस में ट्रांजैक्शन की जानकारी इस तकनीक के जरिए रखी जा सकती है। यूजर क्या खरीद रहा है,बिल पेमेंट आदि को Block Chain Technology से सुरक्षित किया जा सकता है। साथ ही Bitcoin से Payment कर टैक्स से छुटकारा मिलेगा।

3. Bank And Finance

बैंकिंग और फाइनेंस जैसे कार्यों में ब्लॉकचेन अहम भूमिका निभा सकती है। बैंक इससे सुरक्षित Digital wallet बना सकते हैं। जो कि कम कीमतों पर देश-विदेशों में लेनदेन हेतु उपयोग किया जा सकता है।

4. Elections

Voting में इस तकनीक का उपयोग करें इलेक्शन में हुई धोखाधड़ी को खत्म किया जा सकता है जिससे वोटिंग सिस्टम बेहतर होगा।

5. Health

Blockchain से स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेजों को नेटवर्क में जोड़ा जा सकता है। जिससे हर मरीज के डाटा को कई वर्षों तक मैनेज किया जा सकता है। बायोमैट्रिक्स का उपयोग कर मरीज की सारी जानकारी देखी जा सकती है।

ब्लॉकचेन प्लेटफ़ोर्म क्या हैं?- Blockchain Plateform In Hindi

blockchain Plateform का मतलब ऐसे plateform जिन्होंने ब्लॉकचेन को बेहतर बनाने में अपना अलग-अलग सहयोग दिया है। जिसे ऐसा नेटवर्क बने जिस का भविष्य में हर क्षेत्र में उपयोग किया जा सके।

1. Ethereum

एथेरियम एक Open Source Blockchain Plateform है। जो Proof of Work (poW) एल्गोरिदम पर काम करता है। यह एक पब्लिक ब्लॉकचेन लैज़र सिस्टम है। इसको उद्योगों में उपयोग हेतु बेहतर बनाया गया है। ethereum डेवलपर्स ने इसे बनाया है।

2. Hyperledger

यह linux foundation की देन है। लिनक्स के ब्लॉकचेन नेटवर्क में Hyperledger को जोड़ने के बाद इस तकनीक में काफी विकास हुआ। जहां बहुत से देशों ने अलग-अलग उद्योगों में इसका प्रयोग करना शुरू किया।

3. R3 corda

R3 Corda बाकी फाइनेंशियल कंपनियों के साथ मिलकर ब्लॉकचेन के नए उपयोगों को खोजा r3 corda के साथ विश्व की फाइनेंसियल ऑर्गेनाइजेशंस ब्लॉकचेन नेटवर्क को बेहतर बनाने में साथ आए। साथ ही इन कंपनियों ने ब्लॉकचेन नेटवर्क के लिए fund भी इकट्ठा किया था।

4. Ripple

Ripple ने ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी में फाइनेंशियल लेनदेन सिस्टम देने में भूमिका निभाई।

5. Quorum

एथेरियम की तरह Quorum भी एक Open-Source ब्लॉकचेन प्लेटफॉर्म है। जिसे Ethereum और JP Morgan Chase. Co ने मिलकर बनाया। इसका उद्देश्य ब्लॉकचेन तकनीक को बिजनेस जरूरतों के हिसाब से सुधारना था। जैसे सिक्योरिटी, डिसेंट्रलाइजेशन, ट्रांसपेरेंसी, इमियूलबिलिटी चीजों को बनाना।

बिजनेस में Blockchain का उपयोग क्यों जरूरी है?

  1. क्रिप्टोग्राफी का उपयोग कर बिजनेस डाटा को सुरक्षित किया जा सकेगा।
  2. व्यवसाय में किसी भी तरह की धोखाधड़ी नहीं होगी।
  3. व्यवसाई को कुशलता पूर्वक संचालन करने में ब्लॉकचेन की अहम भूमिका होगी।
  4. हर छोटी बड़ी जानकारी को ब्लॉकचेन नेटवर्क के जरिए आसानी से ट्रैक कर सकेंगे।
  5. बिजनेस संबंधी जरूरी डेटा को ना कोई बदल सकेगा न ही मिटा।
  6. बिजनेस ट्रांजैक्शन पर नजर रखी जा सकती है।

ब्लॉकचेन कितना सुरक्षित है?

ब्लॉकचेन डिसेंट्रलाइज्ड लेजर सिस्टम है। जिसमें आपके डाटा के साथ कोई भी व्यक्ति या सरकार,बैंक किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं कर सकता। साथ ही ब्लॉकचेन तकनीक में Consensus Algorithm का प्रयोग किया गया है।जिससे सिस्टम में किसी भी तरह की चूक नहीं हो सकती।

Cryptography के उपयोग से सिक्योरिटी काफी मजबूत होती है। आपका डाटा कंप्यूटर्स के द्वारा मैनेज किया जाता है। Smart Contracts तकनीक से ऑटोमेटिक सभी प्रकार के लेनदेन और डेटा को मैनेज किया जाता है।

Blockchain Technology का क्या भविष्य है?

ब्लॉकचेन भविष्य की टेक्नोलॉजी है। हालांकि इसमें समय के साथ कहीं बदलाव होंगे। Technology की हर फील्ड में इसका उपयोग कर गलत गतिविधियों को नियंत्रित कर सकते हैं। वहीं आज लगभग हर सिस्टम में भ्रष्टाचार फैला है।

अगर ऐसी तकनीक लोगों को मिले जो पारदर्शिता,सुरक्षा,विकेंद्रीकृत हो तो उसे सभी मंजूर करेंगे। वह टेक्नोलॉजी Blockchain है। जिसे हर सिस्टम पर पैनी नजर रखी जा सकती है। हर प्रकार का डाटा कहां से किधर और किसके पास आ रहा है। सभी गतिविधियों को नियंत्रित किया जा सकता है।

ब्लॉकचेन के नुक़सान :

  1. ब्लॉकचेन तकनीक में बिजली की खपत ज्यादा है।
  2. ज्यादा यूजर्स होने पर ब्लॉकचेन नेटवर्क धीमा हो जाता है।
  3. ब्लॉकचेन का किसी उद्देश्य हेतु उपयोग में लाना महंगा है।
  4. यूजर सिर्फ अपने वॉलेट को नेटवर्क पर मेंटेन कर सकता है। अन्यथा वह अपने वॉलेट से Access को सकता है।
  5. ब्लॉकचेन डाटा अपरिवर्तनीय है।

ब्लॉकचेन के लाभ :

  1. Transaction प्रक्रिया बाकी तकनीक के मुकाबले सस्ती और तेज है।
  2. ब्लॉकचेन नेटवर्क डिसेंट्रलाइज्ड लेजर सिस्टम है।
  3. किसी Data को ट्रैक करना आसान है।
  4. सुरक्षा और प्राइवेसी गारंटी।
  5. किसी भी तरह के Technical Failure की गुंजाइश नहीं।

Blockchain कितने प्रकार के होते हैं?

ब्लॉकचेन मुख्य चार प्रकार के होते हैं- 1. Public Blockchain 2. Private blockchain 3. consortium Blockchain 4. hybrid blockchain

Genesis Block क्या हैं?

ब्लॉकचेन बहिखाता (ledger) में सबसे पहले बनने वाले ब्लॉक को Genesis Block कहते हैं। सबसे पहला Hash इसी ब्लॉक में बनता है।

Hash क्या होता हैं?

ब्लॉकचेन के अंदर जो डाटा ब्लॉक के अंदर स्टोर किया जाता है। उसका यूनिक कोड मिलता है जिसे ‘Hash’ कहते हैं।

Decenterlized का मतलब क्या हैं?

आसान भाषा में Decenterlized का मतलब यानी कि ब्लॉकचेन में आपके डाटा को कोई किसी भी प्रकार से हानि नहीं पहुंचा सकता। ब्लॉक Decenterlized ledger सिस्टम है।

ब्लॉकचेन के अविष्कारक कौन है?

ब्लॉकचेन के आविष्कारक stuart Haber और Scott Stornetta हैं। जो क्रिप्टोग्राफर और कंप्यूटर साइंटिस्ट है।

निष्कर्ष-

Blockchain का उपयोग भविष्य में लगभग हर देश करेगा। इसके आसार विश्व के विकसित देशों से है- जैसे कि सिंगापुर जैसा विकसित देश ने “ब्लॉकचेन रिसर्च और डेवलपमेंट” में $225 मिलियन लगाए हैं। साथ ही अगर ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी में करीयर की बात करें। तो तकरीबन हर बड़ी IT Company ब्लॉकचेन इंजीनियर को ढूंढ रही है।

Blockchain Technology में अभी बहुत बदलाव होने बाकी है। ताकि इसे आसानी से उपयोग में लाया जा सके। हर यूज़र इसका लाभ उठा सके।

Blockchain क्या है? ब्लॉकचेन के प्रकार,लाभ,अनुप्रयोग हमें आशा है की आप हमारे इस आर्टिकल में दी जानकारी अच्छे से समझ पाए होंगे। इसे अपने दोस्तों में जरूर शेयर करें।

मेरा नाम Abhishek है। इस ब्लॉग का संस्थापक और लेखक हूं। मै Yoabby.com पर सभी आर्टिकल को हिंदी भाषा में लिखता हूं। मुझे लिखने का बहुत पहले से ही शौक था। ब्लॉगिंग के द्वारा मैं अपने शौक को भी पूरा कर रहा हूं। और साथ ही YoAbby.com पर आए लोगों को टेक्नोलॉजी के बारे में हिंदी भाषा में आर्टिकल उपलब्ध करवा रहा हूं।

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