मशीन लर्निंग क्या हैं- कार्य, प्रकार, अनुप्रयोग और उदाहरण हिंदी में

मशीन लर्निंग इन हिंदी– आज का हमारे इस आर्टिकल का विषय मशीन लर्निंग है? इस आर्टिकल में हम मशीन लर्निंग एल्गोरिथम के बारे में जानेंगे। कि आखिर इनका उपयोग आज हर तरह के बिजनेस में क्यों किया जा रहा है? मशीन लर्निंग से जुड़ी तमाम छोटी-बड़ी जानकारी आपको यहां मिलेगी।

सबसे पहले बता दें की Machine Learning आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शाखा (Branch) है। यानी यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंप्यूटर साइंस से संबंधित है।

रिपोर्ट के अनुसार मशीन लर्निंग (ML) की मार्केट वर्ष 2016 में $1 बिलियन थी। परंतु बड़ी कंपनियों के द्वारा इसका उपयोग अपने व्यवसाय में तेजी से किया गया। जिससे अनुमान है कि मशीन लर्निंग की मार्केट वैल्यू वर्ष 2020 तक $117 बिलियन हो जाएगी।

मशीन लर्निंग का उपयोग गूगल सर्च इंजन में लोगों को उनकी रूचि के हिसाब से परिणाम दिखाने हेतु किया गया है। तो वहीं धीरे-धीरे इसका उपयोग कई सर्विस में बड़ी कंपनियों के द्वारा अपने बिजनेस को आगे बढ़ाने हेतु किया जा रहा है।

मशीन लर्निंग में मशीन को एल्गोरिदम की सहायता से खुद से सीखने की क्षमता प्रदान की जाती है। जिससे मशीन या सिस्टम को जितना डाटा मिलता है। वह उसी डाटा से इंसानों की तरह खुद सोच समझकर और अनुभव के आधार पर काम करती है।

रिपोर्ट के अनुसार 58% बिजनेस प्रोडक्शन में मशीन लर्निंग मॉडल का उपयोग कर रहे हैं। जैसा कि आप जानते हैं मशीन लर्निंग (ML) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का ही हिस्सा है। तो बता दें कि अनुमानित $80 बिलियन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बिजनेस के बचाएगी। जिसमें मशीन ही सभी कार्य खुद से कर सकेगी।

तो दोस्तों अब आप थोड़ा बहुत Machine Learning के बारे में समझ चुके होंगे। आगे हम इससे संबंधित और ज्यादा जानकारी इस आर्टिकल में जानेंगे।

आपका और ज्यादा समय न लेते हुए मशीन लर्निंग क्या है? इसके अनुप्रयोग, प्रकार, मशीन लर्निंग क्यों जरूरी है? और कैसे काम करती है? जैसी तमाम जानकारी इस आर्टिकल में जानते हैं।

आपसे विनम्र प्रार्थना है कि कृप्या मशीन लर्निंग से संबंधित इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें? क्योंकि हम नहीं चाहते आपसे एक भी टॉपिक इसके बारे में छूटे और आप अपने मित्रों के सामने अनभिज्ञ प्रतीत हो। कृपया आर्टिकल को पूरा पढ़ें।

सामग्री की तालिका :-

कंप्यूटर प्रोग्राम क्या होता है?

आसान भाषा में कंप्यूटर प्रोग्राम में प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के द्वारा कंप्यूटर को समझाया जाता है कि किसी भी डाटा को कैसे रीड करना है। प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में “Set Of Instructions” लिखे जाते हैं। जिससे कंप्यूटर कार्य को कर पाता है।

मशीन लर्निंग क्या है?

Machine Learning image

आसान भाषा में मशीन लर्निंग का अर्थ होता है- “मशीन को सिखाना” इसे हिंदी में “यंत्र शिक्षण” कहते हैं। मशीन लर्निंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ही शाखा है। जिसमें कंप्यूटर सिस्टम को प्राप्त डाटा के अनुसार खुद से सीखने की क्षमता दी जाती है। इसमें कईं अलग प्रकार के मशीन लर्निंग एल्गोरिथम्स लिखे जाते हैं। जो किसी भी तरह के डाटा से खुद से सीखते हैं और इंसानों से भी बेहतर परिणाम निकालते हैं।

मशीन लर्निंग का मुख्य कार्य कंप्यूटर प्रोग्राम को इतना ज्यादा विकसित करना है कि उसे जितना डाटा मिले वह उस डाटा से खुद-ब-खुद सीख सकें।

उदाहरण: हमारे स्मार्टफोन में हम “OK Google” बोलकर गूगल असिस्टेंट से कोई भी सवाल पूछते हैं। वह हमें गूगल सर्च इंजन से डाटा निकालकर हर सवाल का जवाब देता है। इसमें Machine Learning Algorithm कार्य करते हैं यानी कि गूगल असिस्टेंट से हम जितना सवाल करेंगे। वह उतना खुद मशीन लर्निंग की सहायता से अपने आप को बेहतर बनाता जाएगा।

साथ ही बता दें कि मशीन लर्निंग इंसानों की तरह अपने अनुभव के आधार पर भी निर्णय लेती है। जैसे ज्यादा बार प्रश्न पूछने पर मशीन हर बार पहले से बेहतर उत्तर देगी। क्योंकि एल्गोरिदम की सहायता से वह पिछले दिए गए सवाल के उत्तर पर भी गहरा अध्ययन करती है और अनुभव प्राप्त करती है। जिससे मशीन आसानी से सही जवाब इंसानों के मुकाबले बेहद कम समय में देती है।

मशीन लर्निंग कि खुद से सीखने की क्षमता के आधार पर ही मशीन लर्निंग मॉडल को हर तरह का बिजनेस अपना रहा है। मशीन लर्निंग हर कार्य कर सकती है। हालांकि मशीन को जिस तरह का डाटा मिलेगा। उसमें अनुभव प्राप्त करने में थोड़ा समय जरूर लगता है। क्योंकि मशीन लर्निंग मॉडल अपने आपको तभी बेहतर बनाता जाएगा। जब उसे बार-बार नया डाटा मिलता जाएगा और अनुभव प्राप्त करता जाएगा।

मशीन लर्निंग का इतिहास (History of Machine Learning)

अब हम Machine Learning के इतिहास के बारे में जानेंगे। कि आखिर मशीन लर्निंग एल्गोरिथम्स बनाने का विचार कहां से आया और समय के साथ इसमें क्या-क्या बेहतर होता गया। मशीन लर्निंग के इतिहास को हमने वर्ष 1950 से लेकर वर्ष 2016 तक बताया है। ताकि आप आसानी से सभी चीजों को जान सकें।

  1. वर्ष 1950 ने महान कंप्यूटर साइंटिस्ट “Alan Turing” ने Turing Test को बनाया। जिसमें यह पता लगाया कि क्या मशीन इंसानों की तरह सोच-समझकर जवाब दे सकती है या नहीं?
  2. वर्ष 1952 में अमेरिकन कंप्यूटर साइंटिस्ट “Arthur Samuel” ने दुनिया का पहला Computer Learning Program लिखा। यह प्रोग्राम Game of Checkers के लिए लिखा गया था। Arthur Samuel को मशीन लर्निंग का आविष्कारक कहा जाता है।
  3. वर्ष 1957 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र में साइकोलॉजिस्ट “Frank Rosenblatt” ने विश्व का पहला Neural Network बनाया। जिसका नाम The Perceptron है। यह मनुष्य के सोचने-समझने की क्षमता कि नक़ल करने में सक्षम है।
  4. वर्ष 1964 में Evelyn Fix और Joseph Hodges ने Nearelt Neighbor Algorithm को बनाया। हालांकि बाद में इसमें Thomos Cover ने सुधार किए। इस एल्गोरिदम का कार्य बुनियादी पैटर्न की पहचान करना था। जिसका उपयोग किसी यात्री को उसके यात्रा करने के रास्ते की मैपिंग करने के लिए किया जा सकता था।
  5. वर्ष 1979 में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों ने ऐसी गाड़ी बनाई। जो अपने सामने आने वाली किसी वस्तु को पहचान लेता था और दिशा बदल लेता था। जिसका नाम Stanford Cart था।
  6. वर्ष 1981 में Gerald Dejong ने Explanation Based Learning अवधारणा (Concept) को पेश किया। इसमें कंप्यूटर प्राप्त डाटा की जांच करता था और सिर्फ जरूरी चीजों को ही अपने नियमों में जोड़ता था। आज मशीन लर्निंग में इसका उपयोग सुपरवाइज्ड लर्निंग में किया जाता है।
  7. वर्ष 1985 में कंप्यूटर रिसर्चर ने आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क को बनाया। जिसका नाम “नेटवर्क”Nettalk” था। यह बच्चों की आवाज में किसी भी शब्द को बोलने में सक्षम था।
  8. वर्ष 1990 में कंप्यूटर साइंटिस्ट के द्वारा मशीन लर्निंग Data Driven Approach पर काम किया गया। इसमें ज्यादा मात्रा में डाटा की छानबीन करना और सही निर्णय लेना और प्राप्त परिणामों से मशीन का सीखना शामिल है। इसका उपयोग बड़ी कंपनियां अपने ग्राहकों को बेहतर सुविधा देने हेतु उपयोग करते हैं।
  9. वर्ष 1997 में IBM Deep Blue नामक रोबोट जो शतरंज खेल को खेलता था। इस रोबोट में विश्व प्रसिद्ध शतरंज खिलाड़ी Garry Kasprov को हराया। IBM Deep Blue मशीन लर्निंग प्रोग्राम पर आधारित था।
  10. वर्ष 2006 में कंप्यूटर साइंटिस्ट Geoffrey Hinton ने “डीप लर्निंग” नाम का उपयोग उनके द्वारा बनाए एक नए एल्गोरिदम के लिए किया गया। जो किसी पिक्चर या वीडियो में से Text और Objects को अलग दिखा सकता था।
  11. वर्ष 2010 में विंडोज़ कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने Kinect नामक Motion Sensing Input Device बनाई। जो 20 ह्यूमन फीचर जैसे हाथ हिलाना, टांगों की गतिविधि को ट्रैक करती है और यह डिवाइस एक सेकंड में 30 बार मानवीय विशेषताओं को ट्रैक कर सकती है। इसके जरिए मनुष्य कंप्यूटर से अपने शरीर की गतिविधियों और इशारों से इंटरेक्ट कर सकता है।
  12. वर्ष 2011 में IBM Watson कंप्यूटर ने अपने प्रतियोगी जो कि इंसान था। एक ‘Quiz Show Jeopardy’ में हराया। इसी वर्ष Google Brain को भी बनाया जा चुका था। जिसमें Deep Neural Network का उपयोग था। जो अपनी खोज से सीख सकता था और चीजों को श्रेणीबध कर सकता था।
  13. वर्ष 2012 में Google X Lab ने मशीन लर्निंग एल्गोरिथम को बनाया। यह एक Neural Network था। जब इसे Youtube पर यह देखने के लिए टेस्ट किया कि आखिर यूजर्स यूट्यूब पर सबसे ज्यादा क्या खोजते हैं तो इस एल्गोरिदम ने बिल्लियों की फोटो को दिखाया।
  14. वर्ष 2014 में सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक के द्वारा एक सॉफ्टवेयर एल्गोरिदम को बनाया गया। जिसका नाम “Deep Face” है। यह एल्गोरिदम बिल्कुल इंसानों की तरह फोटोस पर से इंसानी चेहरों की पहचान कर सकता है।
  15. वर्ष 2015 में माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के द्वारा Machine Learning Tool Kit को बनाया गया। जिसका उपयोग कोई भी बिजनेस अपने लिए कर सकता था। इसमें Tranning Models भी दिए जाते थे।
  16. वर्ष 2015 में ही Amazon के द्वारा खुद का मशीन लर्निंग प्लेटफॉर्म लांच किया गया। साथ ही इसी वर्ष Stephen Hawking, Elon Musk जैसे मशहूर व्यक्तिव के द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (मशीन लर्निंग) के विकास को इंसानों के लिए खतरनाक बताया।
  17. वर्ष 2016 में गूगल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने विश्व की सबसे मुश्किल गेम “Go” के प्रोफेशनल खिलाड़ियो को हराया। गूगल के द्वारा बनाये AI एल्गोरिदम का नाम “Alpha Go” है।

मशीन लर्निंग एल्गोरिथम्स कितने प्रकार के होते हैं?

मशीन लर्निंग एल्गोरिथम्स मुख्यत: चार प्रकार के होते हैं:

  1. Supervised Learning
  2. Un-Supervised Learning
  3. Semi-Supervised Learning
  4. Reinforcement Learning

समझें: एल्गोरिदम में मुख्यत कंप्यूटेशनल समस्याओं का हल निकालने के लिए निर्देश लिखे जाते हैं। जो प्रोग्राम को बताते हैं कि किसी भी टास्क को किस तरह करना है। ठीक इसी प्रकार मशीन लर्निंग एल्गोरिथम तैयार किए गए हैं। जो मशीन लर्निंग मॉडल में अप्लाई किए जाते हैं। किसी भी तरह का बिजनेस हो वह मशीन लर्निंग मॉडल का उपयोग करता हो। वह इन्हीं एल्गोरिदम का उपयोग करता है। जिससे मशीन एल्गोरिदम की सहायता से कार्य को समझते हैं सीखते हैं और प्राप्त अनुभव के आधार पर परिणाम दिखाते हैं।

आइए विस्तार से अब सभी मशीन लर्निंग एल्गोरिथम के प्रकारों को समझते हैं।

1. Supervised Learning

आसान भाषा में समझें: सुपरवाइज्ड मशीन लर्निंग में मशीन लर्निंग मॉडल को ट्रेनिंग डाटा उपलब्ध कराया जाता है। जिसे हम ‘Input’ कहते हैं। ठीक वैसे ही जैसे स्कूलों में विद्यार्थी को अध्यापक के द्वारा स्टडी मटेरियल उपलब्ध कराया जाता है। जिसके बार-बार पढ़ लेने के बाद यानी ट्रेनिंग करने के बाद विद्यार्थी अध्यापक की तरफ से पूछे सवाल का जवाब आसानी से अपने दिमाग में मौजूद जानकारी के हिसाब से दे देता है।

सुपरवाइज्ड लर्निंग में ठीक इसी तरह मशीन लर्निंग मॉडल को ट्रेनिंग डाटा दिया जाता है। जिसे ‘Input Data’ कहते हैं। अब इस लर्निंग में ‘Input Data’ के हिसाब से ‘Output’ प्राप्त किया जाता है। इसके बाद जब मॉडल को Input और Output डाटा मिल जाता है। तो सुपरवाइज्ड लर्निंग इस डाटा को बार-बार अभ्यास करती है और नया Output निकालती है। जो बिल्कुल सटीक होता है। इसी तरह से मशीन बार-बार ट्रेनिंग डाटा का अभ्यास करती है और अपने आप को पहले से बेहतर बनाती जाती है।

सुपरवाइज्ड मशीन लर्निंग मॉडल इसी तरह हर तरह के कार्य में उपयोग किए जाते हैं। आइए उदाहरण से समझते हैं: जैसे हम मशीन को पहले ट्रेनिंग डाटा देते हैं। जिसमें हाथी और घोड़े की आंख, कान, आकार, लंबाई, ऊंचाई शामिल है। अब इस ट्रेनिंग डाटा के हिसाब से सुपरवाइज्ड लर्निंग मॉडल का उपयोग करते हुए मशीन दोनों ऑब्जेक्ट को उनके आकार और इनकी शरीर के हिसाब से सभी चीजें जांच लेती है। इस ट्रेनिंग डेटा का निरंतर अभ्यास करती है और अपनी लर्निंग को मजबूत बनाती है।

इसलिए जब भी मशीन से आउटपुट लिया जाएगा। यह किस जानवर की तस्वीर है तो वह सटीक जवाब देती है और एक बार आउटपुट मिल जाता है तो और ज्यादा डाटा मिलने पर वह अपने अपनी लर्निंग को Input और Output Data दोनों डेटा का उपयोग अपने आप को बेहतर बनाने में करती है।

सुपरवाइज्ड लर्निंग एल्गोरिथम को दो भागों में वर्गीकृत किया गया है:

  1. Classification
  2. Regression

1. Classification Algorithm

जैसा कि आप जानते हैं: Classification का अर्थ होता है- ‘वर्गीकरण’ Classification Algorithms में प्राप्त आउटपुट से उन समस्याओं को हल किया जाता है। जिन्हें वर्गीकृत यानी अलग करना होता है। जैसे लाल और नीले रंग के बॉल हैं तो इस एल्गोरिदम का उपयोग इन्हें रंगों को अलग-अलग कैटेगरी में रखना है। सुपरवाइज्ड लर्निंग से इनके पास डाटा पहले से ही होता है। बस इन्हें वर्गीकृत भविष्यवाणी करनी होती है। जिसे चीजों को अलग अलग किया जा सके।

Classification Algorithms के कई एल्गोरिदम होते हैं। जिनका उपयोग अलग-अलग मशीन लर्निंग मॉडल या फिर एक ही मॉडल में किया जा सकता है। क्लासिफिकेशन एल्गोरिथम के एल्गोरिदम इस प्रकार हैं:

  1. Logistic Regression
  2. Naive Bayes Classifier
  3. K-Nearest Neighbor
  4. Support Vector Machine
  5. Decision Tree Algorithm
  6. Random Forest Algorithm

Classification Algorithms के उधाहरण- Email Spam Detection, Speech Recognition, Email Filtering.

2. Regression Algorithm

Regression का अर्थ ‘प्रतिगमन’ होता है जिसका मतलब वापस आना, लौटना। Regression Algorithm में Input और Output डाटा के बीच उस समस्या को खोजा जाता है। जो एक-दूसरे के बीच संबंध प्रदर्शित करती हो। यह रैखिक संबंध हो सकते हैं। जिन्हें Linear Relationship कहा जाता है।

बता दें कि इसका उपयोग निरंतर आउटपुट के उन Linear Relationship की भविष्यवाणी करते रहना है। जो आउटपुट को निरंतर प्रभावित करती है। उदाहरण से समझते हैं: जैसे हम स्टॉक मार्केट में अंकों का उछाल या आंकड़ों का नीचे गिरना देखते हैं। वह ग्राफ में हमें दिखता है जो Regression Algorithm के उपयोग से उन अंकों की भविष्यवाणी (Predicts) करता है और उसका निरंतर ग्राफ बनाता जाता है। Regression Algorithm का उपयोग Numbers की भविष्यवाणी (Prediction) करने हेतु किया जाता है।

Regression Algorithm के भी कई एल्गोरिदम होते हैं। जो अलग-अलग तरह के मशीन लर्निंग मॉडल में उपयोग में लाए जाते हैं। यह एल्गोरिदम इस प्रकार हैं:

  1. Linear Relationship
  2. Ridge Regression
  3. Decision Tree Algorithm
  4. Multivariate Regression
  5. Stepwise Regression

Regression Algorithm के उधाहरण इस प्रकार है- Stock Market Predictions, Rainfall Prediction, Market Trends, Weather Prediction.

2. Un-Supervised Learning

आसान भाषा में: Un-Supervised Learning में मशीन लर्निंग मॉडल को किसी भी तरह का Output Data उपलब्ध नहीं कराया जाता। जबकि Supervised Learning में मॉडल को Input और Output डेटा का निरंतर अभ्यास कर परिणाम को Predicts (भविष्यवाणी) करनी होती थी। परन्तु Un-Supervised Learning Model में सिर्फ़ Input डेटा ही मशीन लर्निंग मॉडल को दिया जाता है।

Unsupervised Learning Algorithm का कार्य सिर्फ़ प्राप्त Input Data से जानकारी को समानता के आधार पर, पैटर्न के आधार पर और एक से दूसरे डेटा के बीच क्या अंतर है। उस हिसाब से डेटा को समूह (Group) और श्रेणियों (Category) में बाँटना है। इस लर्निंग के तहत मशीन सीखती है की किसी वस्तु के पैटर्न को किस तरह समझना है और पैटर्न को ढूँढना है।

उधाहरण के साथ समझते है:- मान लीजिए एक बॉक्स है उसमे हर आकार कि चीजें रखी हुई है। अब उन वस्तुओं की पिक्चर को UnSupervised Learning Algorithm के तहत समझा जाता है की यह कैसी चीजें है। अब अनसुपरवाइज्ड लर्निंग एल्गोरिदम उन वस्तुओं को अलग-अलग पैटर्न के हिसाब से रीड करेंगे। जैसे लंबाई, चौड़ाई, आकार, क्या समानता है इत्यादि। तो यहां पर मशीन को डाटा मिल गया। अब जब भी मशीन लर्निंग मॉडल से कोई उन वस्तुओं से संबंधित आउटपुट लेगा।

तो मशीन अपने पास कलेक्ट किए डाटा के हिसाब से हर वस्तु को उसके समानता पैटर्न और अंतर के हिसाब से अलग समूह और श्रेणी में बांट देगी।

अनसुपरवाइज्ड लर्निंग एल्गोरिदम को दो भागों में वर्गीकृत किया गया है:

  1. Clustering
  2. Association Analysis

1. Clustering Algorithm

Cluster का अर्थ हिंदी अर्थ होता है “समूह, गुच्छा झुंड” क्लस्टर एल्गोरिदम का काम डाटा को समानता के आधार पर अलग-अलग रूप में बांटना है। जैसे 3 तरह के रंग के बिंदु हैं। लाल, नीला, हरा यह एल्गोरिदम अपनी टेक्निक से इन तीनों श्रेणी को अलग-अलग समूहों में विभाजित कर देगा। समानता के आधार पर।

Cluster Algorithm के भी कई एल्गोरिदम होते हैं। जो अलग-अलग मशीन मॉडल में उपयोग में लाए जाते हैं:

  1. K-Median Clustering Algorithm
  2. Expection Maximization
  3. Hierarchical Clustering
  4. Mean-Shift
  5. Independent Component Analysis

Cluster Algorithm के उदाहरण इस प्रकार है: Identifying Fake News, Document Analysis.

2. Association Algorithm

Association का हिंदी अर्थ “संगठन” होता है। Association Algorithm को ‘एसोसिएशन रूल लर्निंग’ भी कहते हैं। इसमें ऑब्जेक्ट या चीजों की मैपिंग की जाती है। जिसकी निर्भरता एक-दूसरे के ऊपर हो। इसमें जो डाटा मशीन लर्निंग मॉडल को दिया जाता है। वह Unlabled Data होता है। यानी Association Algorithm के तहत सिर्फ वस्तुओं को अलग रखा जाता है। जो एक-दूसरे पर निर्भर हो।

उदाहरण जैसे: Market Basket Analysis, Continues Production. साथ ही इसका एक उदाहरण है: जैसे हम शर्ट के साथ कौन-सी पेंट पहनते हैं। दोनों मैचिंग हो। एक-दूसरे पर निर्भर हो या फिर बाजार में ब्रेड के साथ मक्खन खरीदना या ब्रेड के साथ दूध यानी Association Rule ऐसी ऑब्जेक्ट को एक साथ जोड़ देता है।

Association Algorithm के कुछ ऐसे एल्गोरिदम है। जिनका उपयोग यह एल्गोरिदम करता है:

  1. APRIORI
  2. FP-Growth Algorithm
  3. Eclat

3. Semi-Supervised Learning

Semi-Supervised Learning में Semi का अर्थ है “एक दूसरे से जुड़े रहना” यानी कि इस लर्निंग में Supervised और Unsupervised Learning Algorithm का उपयोग होता है। जो एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। यानी Labled Data और Unlabled Data दोनों ही सेमी सुपरवाइज्ड लर्निंग में काम आते हैं।

उदाहरण के लिए: जैसे आपको कुछ पिक्चर दी गई हैं। जिसे आपको Labled यानी मशीन लर्निंग मॉडल को बताना है कि यह किस ऑब्जेक्ट की पिक्चर है। साथ ही और ज्यादा पिक्चर भी दी गई हैं। आपको हर Unlabled Data को Labled करना है कि यह किस-किस ऑब्जेक्ट की पिक्चर है। जो आपको पिक्चर समझ नहीं आती। आप उसे Unlabled Data श्रेणी में रख देते हैं।

परंतु ऐसे ही मशीन लर्निंग मॉडल सेमी-सुपरवाइज्ड लर्निंग एल्गोरिदम का उपयोग करता है और Unlabled Picture में से भी कुछ जानकारी को कलेक्ट करता रहता है। यानी Input और Output ठीक सुपरवाइज्ड लर्निंग और अनसुपरवाइज्ड लर्निंग एल्गोरिथम का उपयोग करता है। इस तरह लर्निंग के तहत बहुत ज्यादा मात्रा में लेबल डाटा मशीन के पास इकट्ठा हो जाता है। जिसमें Unlabled Data की Collect की जानकारी होती है। जिसका उपयोग Semi-Supervised Learning के लिए करती है।

इसलिए इस एल्गोरिदम को जब भी किसी पिक्चर को पहचानने हेतु यानी Unlabled Data को Labled Data बनाने के लिए उपयोग किया जाएगा। तो वह मशीन लर्निंग मॉडल अपने पास कलेक्ट की हुई हर जानकारी का उपयोग मुश्किल से मुश्किल Unlabled Data को पहचानने हेतु करता है।

4. Reinforcement Learning

Reinforcement Learning में Reinforcement का अर्थ “सुदृढ़ीकरण” होता है। जिसका मतलब ‘अच्छी तरह पक्का करना’ रिइंफोर्समेंट लर्निंग एल्गोरिदम में एक Agent होता है। जो अपनी State, Action के आधार पर वातावरण (Environment) से सीखता है इसमें किसी भी प्रकार का इनपुट और आउटपुट डाटा उपलब्ध नहीं कराया जाता है। AI Agent ही वातावरण में अपने Action और State के आधार पर Reward और Punishment को ग्रहण करता है।

जैसे कि एक रोबोट है। वह सीधा खड़ा है। यह उसकी State यानी अवस्था होगी। अब वह अपने पैरों को एक निश्चित दूरी तक आगे रखता है। यह उसका Action यानी चाल होगी और यह सब कुछ एक वातावरण (Environment) में हो रहा है। यानी रोबोट का प्रशिक्षण चल रहा है। अब जो Agent है यानी एक सॉफ्टवेयर वह रोबोट की State (अवस्था), Action (चाल) के आधार पर इनाम देगा या फिर सजा यह पूरा कार्य AI agent पर निर्भर करता है।

Reinforcement Learning में मुख्य फोकस Reward पाना होना होता है। जिसके आधार पर Algorithm खुद से प्राप्त अच्छे इनाम से अपने लर्निंग को मजबूत बनाता है।

रिइंफोर्समेंट लर्निंग का सबसे बड़ा उदाहरण Driverless car है। यानी जब कोई चलती हुई कार Left-Turn ले रही है और दूसरी कार उसके समानांतर चल रही है। तो वह कार को नुकसान पहुंचा सकती है। इसमें जो Reward है वह नकारात्मक (Negative) होगा। लेकिन उस समय कार को तब तक न मोड़े जब तक कि कोई दूसरी कार दूर न हो जाए। तो इसमें जो Reward है। वह सकारात्मक (Positive) प्राप्त होगा।

Reinforcement Learning की प्रक्रिया बहुत लंबी होती है। ज्यादा ट्रायल किए जाते हैं। साथ ही ज्यादा अनुभव के आधार पर ही एल्गोरिदम के लर्निंग मजबूत हो पाती है।

Reinforcement Learning के उधाहरण इस प्रकार है: Robotics, Video games, Text Mining, Multi agent System, Motion Planning, Navigation.

मशीन लर्निंग कैसे काम करती है?

मशीन लर्निंग के काम करने की प्रक्रिया

मशीन लर्निंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की एक शाखा है। किसी भी कार्य को मशीन के द्वारा बिल्कुल सटीक ढंग से करवाने हेतु इसमें एक लंबी प्रक्रिया चलती है। जिसके परिणाम स्वरूप मशीन अपने आप को समयअनुसार बेहतर बनाती जाती है। मशीन लर्निंग कैसे काम करती है? इसके पीछे डाटा की प्रैक्टिस होती है और यह पूरी प्रक्रिया किस तरह कार्य करती है। आइए इसे समझते हैं।

मशीन लर्निंग के काम करने की प्रक्रिया इस प्रकार है:

  1. इनपुट डाटा (Input Data)
  2. डाटा का विश्लेषण करना (Analyze Data)
  3. पैटर्न खोजना (Find Pattern)
  4. भविष्यवाणि या परिणाम देना (Prediction)
  5. फीडबैक स्टोर करना (Store the feedback)

इनपुट डाटा (Input Data)– मशीन लर्निंग एल्गोरिथम प्राप्त इनपुट डाटा के हिसाब से ही कार्य करते हैं। हालांकि ऐसे एल्गोरिदम भी है। जिसमें इनपुट और आउटपुट डाटा की कोई जरूरत नहीं होती। वह अपनी गलतियों से लर्निंग सीखते हैं। जैसे भी Reinforcement Learning परन्तु ज़्यादातर बिजनेस मॉडल में मशीन को इनपुट डाटा दिया जाता है और वह डाटा उस बिज़नेस के प्रकार के हिसाब से दिया जाता है।

डाटा का विश्लेषण करना (Analyze Data)– दूसरी प्रक्रिया में डाटा का विश्लेषण करते हैं। जिसमें डेटा का प्रकार चाहे वह Image हो या Video या किसी अलग तरह का डाटा जैसे Graph और Table जैसी अलग-अलग तरह से डाटा का विश्लेषण करती है और यह प्रक्रिया लगातार चलती है।

पैटर्न खोजना (Find Pattern)- तीसरी प्रक्रिया में प्राप्त डेटा के पैटर्न को मशीन लर्निंग एल्गोरिदम समझते है। पैटर्न कई अलग-अलग तरह के होते हैं। जैसे:

  • Circle Map
  • Bubble Map
  • Double Bubble Map
  • Tree Map
  • Flow Map
  • Bridge Map

मशीन लर्निंग एल्गोरिदम को जिस ही तरह का डाटा उपलब्ध कराया जाता है। वह अपनी लर्निंग में हर तरह के पैटर्न का उपयोग कर डाटा में से पैटर्न खोजती है। ठीक इसी प्रकार अगर मशीन को निरंतर अपने अनुभव से कोई नया डेटा डेवलप कर लेती है। तो वह प्राप्त उस नये डेटा से भी पैटर्न खोजती है। Pattern Recognition से ही मशीन को पिक्चर में कुत्ते और बिल्ली के बीच अंतर समझ आता है।

भविष्यवाणि या परिणाम देना (Prediction)- चौथी प्रक्रिया एल्गोरिदम प्राप्त डाटा से अनुभव और उस डाटा का अभ्यास बार बार करने पर जो भी परिणाम मशीन को प्राप्त होते हैं। मशीन उसकी भविष्यवाणी करती है। उदाहरण: जैसे हमने मशीन को कुछ डाटा दिया था। मशीन ने वह डाटा लिया, फिर उसका विश्लेषण किया, फिर पैटर्न खोजा और यह पूरी प्रक्रिया कर लेने के बाद मशीन लर्निंग एल्गोरिथम हमें उस डाटा का जवाब यानी भविष्यवाणी (Prediction) करते हैं कि उस डाटा से यह जानकारी प्राप्त हुई।

ठीक वैसे ही जैसे हम गूगल पर किसी भी टॉपिक को सर्च करते हैं और कुछ ही सेकंड में हमें परिणाम दिखा दिए जाते हैं। अब चाहे वह Text में चाहते हो या फिर Image या Video में उस हिसाब से मशीन लर्निंग हमें परिणाम देती है।

फीडबैक स्टोर करना (Store the feedback)- पाँचवी प्रक्रिया में एल्गोरिदम के द्वारा जो भविष्यवाणी की जाती है यानी परिणाम दिए जाते हैं। उस डेटा को फीडबैक के तौर पर किया जाता है। यानी हमें आउटपुट तो मिल जाता है। परंतु नया डाटा मशीन को मिलता रहता है। मशीन निरंतर उस डाटा को समझती है, अभ्यास करती है और अनुभव प्राप्त करती है। ताकि जितनी बार हम उससे प्रश्न पूछे वह उस पूछे सवाल का जवाब खुद ढूँढे और प्राप्त डाटा से पहले से बेहतर परिणाम हमें दे।

मशीन लर्निंग के अनुप्रयोग (Machine Learning Application in Hindi)

जैसा कि आप जानते ही हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लगभग हर तरह के व्यवसाय में उपयोग किया जा रहा है। हर कंपनी अपने बिजनेस के अनुसार AI कंपनियों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कार्यरत मॉडल तैयार करवाती है। मशीन लर्निंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ही शाखा (Branch) है। Artificial Intelligence और Machine Learning दोनों के अनुप्रयोग लगभग समान ही है। क्योंकि जब भी कोई कंपनी अपने बिजनेस मॉडल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल को इंटीग्रेट करवाती है तो उसमें AI कि ज्यादातर शाखाओं का इस्तेमाल होता ही है।

चलिए अब जानते हैं मशीन लर्निंग के अनुप्रयोग में कौन सी सेवाएं शामिल है। यह सिर्फ वह जरूरी अनुप्रयोग है। जिसके उपयोग से बड़े-बड़े बिजनेस आगे बढ़े हैं और लोग मशीन लर्निंग जैसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को जान पाये हैं।

मशीन लर्निंग के अनुप्रयोग इस प्रकार हैं:

  1. सोशल मीडिया (Social Media)
  2. वर्चुअल असिस्टेंट (Virtual Assistent)
  3. ई-कॉमर्स (E-Commerce)
  4. ट्रांसपोर्ट (Transport)
  5. हेल्थकेयर (Healthcare)
  6. फाइनेंसियल सर्विस (Financial Service)

1. सोशल मीडिया (Social Media)

सोशल मीडिया जैसे (फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब इत्यादि) इन मशहूर प्लेटफार्म को करोड़ों-अरबों लोगों के द्वारा उपयोग किया जाता है। ऐसे में यह विज्ञापन कंपनियों के लिए बिजनेस को बढ़ाने हेतु सबसे आसान जरिया है। मशीन लर्निंग का उपयोग कर सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले लोगों के इंटरेस्ट का आकलन किया जाता है।

जिससे कंपनियो को डाटा मिल पाता है कि यूजर की सबसे ज़्यादा किस विषय या प्रोडक्ट को लेकर रुचि है। उस हिसाब से कंपनियां विज्ञापन दिखाती हैं और अपने प्रोडक्ट बेचकर मुनाफा कमाती है। यही नहीं मशीन लर्निंग का उपयोग लगभग हर छोटी से छोटी सर्विस देने में किया जाता है। चाहे वह इंस्टाग्राम पर Filters का उपयोग करना हो। आपकी Scrolling करते वक्त आपकी किस कंटेंट में ज्यादा रूचि है। यह सभी चीजें मशीन लर्निंग अपने आप नोटिस करती जाती है।

सोशल मीडिया में मशीन लर्निंग के उदाहरण:

  1. Sentiment Analysis
  2. Filtering Spam
  3. Recommender System- Suggesting Similar People On Facebook/Linkedin. Similar Movies/Books Etc. on Amazon.

2. वर्चुअल असिस्टेंट (Virtual Assistent)

वर्चुअल असिस्टेंट वह सेवा है। जिससे हम कुछ भी सवाल पूछते हैं तो वह हमें इंटरनेट के माध्यम से हर जानकारी Text और Speech के जरिए देती है। वॉइस असिस्टेंट का उपयोग हम अपने मोबाइल और विंडो कंप्यूटर में करते हैं जैसे: एप्पल डिवाइस में Siri, एंड्रॉयड डिवाइस में Google Assistant और कंप्यूटर में Cortana मशीन लर्निंग का सबसे बेहतरीन उदाहरण है।

वॉइस असिस्टेंट इन्हें वर्चुअल असिस्टेंट भी कहते हैं। जिनको अत्यधिक डाटा के द्वारा बार-बार अभ्यास कराया जाता है। जितने ज्यादा सवाल पूछे जाएंगे। उतना ज्यादा यह वॉइस असिस्टेंट मशीन लर्निंग के माध्यम से अपने सिस्टम को मजबूत बनाते हैं। अनुभव प्राप्त करते हैं और हमारे द्वारा पूछे सवाल का जवाब सटीक देते हैं।

वर्चुअल असिस्टेंट में वह हर सेवा शामिल होती है। जिससे हम इंटरनेट के माध्यम से सवाल पूछते हैं। चाहे वह: Language Translation, Text Analytics, Smart Assistant, Search Results, Email Filter, Google Translate. सभी सर्विस नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग पर काम करते हैं। जिसमें मशीनों को इंसानी भाषा को समझने जवाब देने और सीखने की क्षमता विकसित करने पर ध्यान दिया जाता है। यह मशीन लर्निंग का हिस्सा है।

वर्चुअल असिस्टेंट में मशीन लर्निंग के उदाहरण:

  1. Speech Recognition
  2. Natural Language Processing plateforms
  3. Intelligent Agents.

3. ई-कॉमर्स (E-Commerce)

ई-कॉमर्स यानी कि अपने बिजनेस को इंटरनेट पर लाना और इंटरनेट के माध्यम से अपने प्रोडक्ट बेचना। मशीन लर्निंग ई-कॉमर्स कंपनी जैसे: Amazon, Flipkart, Ebay, Fiverr, OLX को अपने बिजनेस को बढ़ाने हेतु अहम योगदान देती है। जिसमें गूगल सर्च इंजन इन कंपनियों की मदद करता है। यूजर किस प्रोडक्ट को सर्च इंजन पर तलाशता है। उसी हिसाब से जिस भी ई-कॉमर्स कंपनी पर वह प्रोडक्ट लिस्ट होगा। उसके रिजल्ट सबसे पहले सर्च रिज़ल्ट्स में दिखा दिए जाते हैं।

साथ ही ई-कॉमर्स कंपनियां Customer Support के लिए भी मशीन लर्निंग का उपयोग करती है। जिसमें नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग का उपयोग शामिल है। किसी भी ई-कॉमर्स वेबसाइट पर विजिट करने पर आपको Product Recommend किए जाते हैं। इन सभी चीजों को Machine Learning के द्वारा ही यूजर को दिखाया जाता है। Payment से लेकर Order आपके घर तक पहुंचना। सभी कार्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से हो पाते हैं।

ई-कॉमर्स में मशीन लर्निंग के उदाहरण:

  1. Customer Support
  2. Product Recommendation
  3. Advertising
  4. Pricing Optimization
  5. Search Results Optimization (SEO)

4. ट्रांसपोर्ट (Transport)

ट्रांसपोर्ट यानी एक इंसान या वस्तु का एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाना। ट्रांसपोर्ट कई तरह का होता है। जैसे: जल मार्ग, वायु मार्ग, थल मार्ग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग लगभग हर तरह के ट्रांसपोर्ट में किया जाता है। चाहे वह एयर ट्रेफिक कंट्रोल सिस्टम को मैनेज करना हो या फिर सड़कों और रेल मार्गों पर ट्रैफिक कंट्रोल की समस्या को नियंत्रित करना हो।

वर्तमान में इलेक्ट्रिक वाहन का उपयोग लोग करना शुरू कर चुके हैं। जिसमें कार की पूरी प्रणाली एल्गोरिथ्म के तहत ही कार्य करती है। Sensor और Camera की मदद से आसपास के वातावरण को मशीन लर्निंग एल्गोरिथम्स मॉडल समझते हैं। जिसमें कई चीजें शामिल होती है। जैसे: ट्रैफिक सिग्नल, सड़क मार्ग, आसपास वाहनों की दूरी इत्यादि।

सड़कों पर लगे ट्रैफिक कैमरा जितनी ज्यादा गाड़ियों के डाटा को कलेक्ट करते हैं। वह उतना ही ज्यादा अपने आप को बेहतर बनाते जाते हैं। इन ट्रेफिक कैमरा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शाखा मशीन लर्निंग का उपयोग होता है। जो निरंतर वाहनों के अलग-अलग पैटर्न को समझते हैं कि वह कार है या ट्रक या बाइक। हर तरह के डाटा को कलेक्ट कर अनुभव प्राप्त कर यह सटीक परिणाम कंट्रोल रूम में भेज जाते हैं।

ट्रांसपोर्ट में मशीन लर्निंग के उदाहरण:

  1. Safety Monitoring
  2. AirTraffic Control
  3. Red-Time Operations Management
  4. Scheduling and Timetabling
  5. Predictive Management

5. हेल्थकेयर (Healthcare)

एक रिसर्च के अनुसार वर्ष 2030 तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विश्व अर्थव्यवस्था में $15 ट्रिलियन का योगदान देगा। साथ ही बता दें कि बाकी दूसरे अनुप्रयोग में सबसे ज्यादा Artificial Intelligence का उपयोग हेल्थ केयर में किया जाएगा। हाल ही में गूगल के द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग कर ब्रेस्ट कैंसर का पता लगाया गया।

साथ ही AI के द्वारा Imaging-Diagoniostics किया जाता है। जिसके द्वारा मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग जैसी AI की शाखाओं (Branch) का उपयोग कर हेल्थ केयर से जुड़े खतरनाक रोगों का पता लगाया जाता है। Google AI के द्वारा त्वचा रोगों, दृष्टि संबंधी ,फेफड़ों के कैंसर का पता लगाना, ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआती स्टेज का पता लगाया जाता है। जिससे रोग का शुरुआती स्टेज में ही उपचार किया जाए।

साथ ही मशीन लर्निंग का उपयोग हम कई Wearable Devices के माध्यम से भी करते हैं। जैसे एप्पल वॉच और फिटनेस बैंड इनमें भी हमारे स्वास्थ्य संबंधी डाटा को कलेक्ट किया जाता है। हॉस्पिटल में मरीजों की देखभाल करने हेतु मशीनों का उपयोग किया जाता है। जो कि मशीन लर्निंग के द्वारा ही संभव होता है।

हेल्थकेयर में मशीन लर्निंग के उधाहरण:

  1. Better Imaging and Diagnostic Technique
  2. Deleting Disease in Early Stage
  3. Clinical Decision Support
  4. Drag discovery and react
  5. Preventing medical insurance frauds
  6. Robotics surgery

6. फाइनेंसियल सर्विस (Financial Service)

वर्तमान में हम अपना सारा लेन-देन Phonepe, Gpay के जरिए करते हैं। साथ ही इसमें UPI Payment भी शामिल है। बड़ी संख्या में ट्रांजैक्शन को संभालने हेतु भी मशीन लर्निंग एल्गोरिथम का उपयोग किया जाता है। ज्यादातर कामकाज बैंकिंग सेवा में कागजों में न होकर मशीन सिस्टम के द्वारा संभाले जाते हैं।

यही नहीं फाइनेंशियल सर्विस से संबंधी हर चीजें चाहे वह स्टॉक मार्केट ही क्यों ना हो ट्रेडिंग के आंकड़ों को दिखाना उतार-चढ़ाव सभी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के द्वारा ही मैनेज किया जाता है। मशीन लर्निंग हर तरह के लेनदेन को सुरक्षित बनाती है।

फाइनेंसियल सर्विस में मशीन लर्निंग के उदाहरण:

  1. Financial Monitoring
  2. Making Investment Predictions
  3. Process Automation
  4. Secure Transaction
  5. Financial Advisory
  6. Risk Management
  7. Algorithm Trading
  8. Fraud Detection
  9. Portfolio Management

मशीन लर्निंग क्यों महत्वपूर्ण है?- Importance of Machine Learning

मशीन लर्निंग टेक्नोलॉजी को विश्व की बड़ी कंपनियों ने अपने अलग-अलग उद्योगों में उपयोग किया है। वर्तमान में हम देखते हैं कि आज हर फैक्ट्री, कारखानों, अस्पतालों यहां तक कि जो आज हम अपने हाथ में स्मार्टफोन का उपयोग कर रहे हैं। उसमें मौजूद ऐप्स में भी मशीन लर्निंग एल्गोरिथम के जरिए डाटा कलेक्ट किया जाता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग होता ही है।

मशीन लर्निंग जरूरी इसलिए है। क्योंकि इसका उपयोग अपने बिजनेस या बड़े उद्योगों में करने से इंसानों की तुलना में कम खर्चा आता है।जिससे ज्यादा पैसा कंपनियों का बचता है। इसी वजह से आने वाले कुछ ही वर्षों में बड़ी कंपनियां ज्यादातर टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री अपने कर्मचारियों को हटाएंगी।

साथ ही इसी तरह जो भी नए बिजनेस शुरू होंगे। उनमें मशीन लर्निंग मॉडल का उपयोग किया जाएगा। हालांकि लोगों को सिर्फ मशीनों के रखरखाव सिस्टम को संभालने हेतु उच्च कौशल कंप्यूटर साइंटिस्ट रखे जाएंगे। जो मशीन के सही कार्य करने के ढंग पर नजर रखेंगे। साथ ही मशीन बहुत कम समय में अपने कार्य में निपुण हो जाती है। जिससे वह इंसानों के मुकाबले काम बहुत जल्दी और बिना थके बिना किसी गलती के करती है।

मशीन लर्निंग इसलिए भी जरूरी है। बढ़ती जनसंख्या के कारण अलग-अलग तरह डाटा को इंसान नहीं संभाल सकते। इसलिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लगभग हर कार्य में लिया जाता है।

मशीन लर्निंग से कौन से उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित है?

विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का हिस्सा यानी मशीन लर्निंग कुछ ऐसे उद्योगों में अपनी अहम भूमिका निभाएगा। जिसे लोगों की बड़ी संख्या प्रतिदिन उपयोग करती है। जो लोगों की जरूरत है। जिसमें लोगों के लिए टेलीकॉम या किसी अन्य कंपनी की तरफ से दी जाने वाली कस्टमर सर्विस, परिवहन, मैन्युफैक्चरिंग और फाइनेंस शामिल है।

मशीन लर्निंग को प्रभावित करने वाले उद्योग इस प्रकार है:

  1. Customer Service (कस्टमर सर्विस)
  2. Transportation (परिवहन)
  3. Manufacturing (उत्पादन)
  4. Finance (फाइनेंस)

1. Customer Service (कस्टमर सर्विस)

मशीन लर्निंग की वजह से विश्व के 81% ग्राहक किसी एजेंट से बात करने की बजाय खुद अपनी समस्या हल करते हैं। जिसमें Chatbots शामिल है। जब भी हम अपने सिम ऑपरेटर से बात करते हैं तो हमें सबसे पहले कुछ निर्देश बताए जाते हैं। आखिर में जाकर हमें कस्टमर केयर से बात करनी होती है। परंतु आज कई सिम ऑपरेटर कंपनियों ने अपनी Apps बना ली है।

जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग हुआ है। हम Chatbot से बात करके अपनी समस्याओं को हल कर सकते हैं। ठीक इसी प्रकार हर तरह के छोटे-बड़े बिजनेस में Chatbot AI का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सुविधा देने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेहद कामग़र है।

2. Transportation (परिवहन)

मशीन लर्निंग सी ट्रांसपोर्टेशन (परिवहन) के डाटा पर नजर रखी जाती है। विश्व में मशीन लर्निंग एल्गोरिथम्स ही परिवहन संबंधी हर छोटी-बड़ी जानकारी को संभालते हैं। डाटा की जांच करते हैं। ITS System जिसका पूरा मतलब ‘इंटेलीजेंट ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम’ है। पूर्ण रूप से मशीन लर्निंग पर ही आधारित है। हर दिन हजारों लाखों वाहन सड़कों से गुजरते हैं।

सुरक्षा से लेकर सड़कों के नियम तोड़ने तक सभी कार्यों में मशीन लर्निंग का उपयोग है। मशीन लर्निंग ट्रांसपोर्टेशन में तमाम चीजों की डेटा जांचती है। जो इस प्रकार है:

  • कार नेविगेशन सिस्टम
  • स्पीड कैमरा
  • सीसीटीवी सिस्टम
  • दुर्घटना का पता लगाने वाला सिस्टम
  • मौसम संबंधी सूचना प्रणाली
  • ट्रेफिक सिगनल कंट्रोल सिस्टम
  • सड़क के बदलने की जानकारी
  • लाइसेंस प्लेट को पहचानने वाले कैमरे

इसके अलावा सेल्फ ड्राइविंग कार्स भी मशीन लर्निंग एल्गोरिथम का उपयोग करती है। जिसके द्वारा वह ITS System को फॉलो करती है।

3. Manufacturing (उत्पादन)

मोटरसाइकिल, कार फैक्ट्री या फिर किसी प्रोडक्ट को बनाने वाली फैक्ट्री में मशीनों को सुव्यवस्थित ढंग से कार्य करने हेतु मशीन लर्निंग एल्गोरिथम ही उपयोग में लाए जा रहे हैं। जो इतने कुशल है कि सिस्टम में किसी भी तरह की आने वाली खराबी को काम रुकने से पहले ही भांप लेते हैं।

साथ ही उत्पादन क्षमता में मशीनों,रोबोट के उपयोग से बेहद तेजी आई है और फैक्टरी मालिकों का पैसा और समय बच जाता है। बल्कि कम समय में ज्यादा उत्पादन किया जा सकता है। साथ ही इंसानों के मुकाबले मैन्युफैक्चरिंग में किसी भी तरह की कोई गलती की गुंजाइश मशीनों से नहीं होती।

मशीन लर्निंग अपने कार्य करने की क्षमता के आधार पर इन्वेंटरी को जाँचती रहती है। जिससे प्रोडक्ट संबंधी बर्बादी कम होती है। वर्तमान में हर कारखाने, फैक्ट्री में मैन्युफैक्चरिंग संबंधी कार्यों में मशीन लर्निंग बिजनेस मॉडल ही काम में लिए जा रहे हैं। हालांकि यह थोड़े महंगे जरूर होते हैं। परंतु एक बार इंप्लीमेंट करने पर यह कई अलग-अलग तरीके से बिजनेस को बढ़ाने में मदद करते है।

4. Finance (फाइनेंस)

विश्व की ज्यादातर बड़ी Fintech Companies और Institutions मशीन लर्निंग टेक्नोलॉजी का उपयोग Process Automation, Security, Underwriting and Credit Scoring, Algorithmic Trading और Robo Advisory में कर रही हैं।

दरअसल मशीन लर्निंग किसी भी प्रक्रिया को बार-बार दोहरा सकती है। सटीक परिणाम देती है। जिसकी बदौलत इंसानों के ज्यादातर काम को मशीनों में बदल दिया है। जैसे: आज Call Agent की जगह Chatbot है। पेपरवर्क को तकरीबन खत्म कर दिया है।

Phonepe, Googlepe जैसी ट्रांजैक्शन सर्विसे में लेनदेन की प्रक्रिया एल्गोरिदम के तहत चलती है। जिसके चलते लेनदेन संबंधी किसी तरह का फ्रॉड नहीं हो सकता। यहां तक कि Algorithmic Trading की वजह से स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग संबंधी निर्णय बेहतर तरीके से ले सकते हैं।

मशीन लर्निंग के उदाहरण- Example of Machine Learning

जैसे कि आप जानते ही हैं। मशीन लर्निंग का उपयोग लगभग हर टेक्निकल फील्ड में होता ही है। अब हम कुछ ऐसे उदाहरण आपको बताएंगे जिसमें मशीन लर्निंग एल्गोरिथम का भली-भांति उपयोग होता है और इन एल्गोरिदम के बिना हम आज के सुखमय जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते।

मशीन लर्निंग का उपयोग लगभग हर सर्विस में किया जाता है। जैसे: Computer Vision, Natural Language Processing, Bioinformatics, Stock Market Analysis, Medical Diagnosis, Speech Recognition. इत्यादि। लेकिन मशीन लर्निंग के मुख्य उदाहरण नीचे बताये गये है।

मशीन लर्निंग के मुख्यतः उदाहरण इस प्रकार है:

  1. E-mail Spam Filtering (बेकार ईमेल को अलग करना)
  2. Mobile Banking (मोबाइल बैंकिंग)
  3. Financial Risk Assessment (वित्तीय जोखिम मूल्यांकन)
  4. Social Networks (सोशल नेटवर्क)

1. E-mail Spam Filtering (बेकार ईमेल को अलग करना)

वर्ष 2007 में लगभग 88% भेजे गए ईमेल Spam Email होते थे। यानी ऐसे ईमेल को सिर्फ धोखाधड़ी करने या फिर यह ऐसे ईमेल होते थे जो न तो जरूरी थे। ना ही किसी कंपनी या व्यक्ति के द्वारा भेजे जाते थे। इन्हें सिर्फ कंप्यूटर में वायरस या हैकर्स के द्वारा डाटा चोरी जैसी घटनाओं को अंजाम देने हेतु भेजा जाता था।

ऐसे में Gmail के द्वारा भविष्य में ईमेल की बढ़ती लोकप्रियता के तहत देखा गया कि जो भी बिजनेस भविष्य में होंगे और ज्यादातर लोगों के द्वारा ईमेल भेजे जाने से ही कार्य पूरे हो सकेंगे। तो ऐसे Spam Emails को रोकने हेतु मशीन लर्निंग के K-NN Algorithm का उपयोग किया गया। जिसके जरिए आज हमे Gmail पर सिर्फ जरूरी ईमेल ही दिखते हैं।

बाकी के अनुचित और जरूरी ने होने वाले ईमेल को एल्गोरिदम की सहायता से Filter कर Spam Emails में भेज दिया जाता है। वर्तमान में हर दिन एक व्यक्ति के पास तकरीबन 150 से ज्यादा ईमेल आते हैं। जिनमें से स्पैम इमेल को फिल्टर कर अलग कर दिया जाता है। इससे लोगों को सही समय पर सही सूचनाएं Email के जरिए मिल जाती है।

2. Mobile Banking (मोबाइल बैंकिंग)

मोबाइल बैंकिंग यानी कि अपने मोबाइल के जरिए बैंकिंग सेवाओं का लाभ लेना। जैसे लेनदेन करना साल 2020 भारत में 68% लोगों के पास स्मार्टफोन है और इस आंकड़े के बढ़ने के साथ-साथ मोबाइल बैंकिंग सेवा का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स की संख्या बढ़ रही है। भारत में 32% लोग ही मोबाइल बैंकिंग सेवा का उपयोग कर रहे हैं।

मशीन लर्निंग की वजह से आज हम ऑनलाइन पेमेंट एप्स जैसे Phonepe, Googlepe पर से कहीं से भी पैसे भेज और प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे में मशीन लर्निंग सिस्टम सुरक्षा संबंधी सभी चीजों का ध्यान रखता है। जैसे एप्स पर लगा Face Recognition जिसके जरिए चेहरे के पैटर्न को समझकर लेनदेन की प्रक्रिया शुरू करना या फिर FingerPrint और Pin Fill-Up करना। इसमें सभी चीजों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ही तो संभालती है। यह मोबाइल बैंकिंग सीधा आपके बैंक से जुड़ी होती है।

हालांकि हमें लेन-देन के करने के लिए किसी फार्म को भरना नहीं होगा। सिर्फ एक क्लिक से लेनदेन संपन्न। ठीक इसी प्रकार कई ऐसी Smartphone Apps आ गई है। जो भरे गए Cheque के हस्ताक्षर की हैंडराइटिंग को पहचान सकती है। कई बैंकों के द्वारा मशीन लर्निंग एल्गोरिथम का उपयोग हैंडराइटिंग को जांचने हेतु किया जाता है।

3. Financial Risk Assessment (वित्तीय जोखिम मूल्यांकन)

विश्व का हर बड़ा वित्तीय संस्थान पूरी तरह से मशीन लर्निंग पर ही निर्भर है। वित्तीय जोखिम मूल्यांकन का मतलब है कि बैंकिंग में ऐसे उपभोक्ता को ही लोन देने से बचना जिसका पूरा रिकॉर्ड खराब रह चुका हो या फिर इन उपभोक्ता के द्वारा ऐसे दस्तावेज पेश किए गए हो। जो पूर्ण रूप से फर्जी हो ताकि वह बैंक से लोन ले सके।

मशीन लर्निंग का उपयोग बैंक और वित्तीय संस्थान करते हैं। जो उपभोक्ता के पुराने रिकॉर्ड को जाँचती है और अधिकारी को अलर्ट करती है कि इस उपभोक्ता के रिकॉर्ड में क्या खामियां हैं। जिससे Loan Application को रद्द या स्वीकार करने का निर्णय लेना आसान हो जाता है।

दरअसल एल्गोरिदम को लाखों लोगों के दस्तावेज से अभ्यास कराया जाता है। जिससे मशीन खुद ब खुद निर्णय लेती है। जिसमें पुराने रिकॉर्ड के आधार पर यह जाँचा जाता है कि यह व्यक्ति डिफॉल्टर है या सही समय पर यह पैसे लौटा रहा है। जैसी तमाम जानकारियां मशीन कलेक्ट करती रहती है। जिससे वित्तीय जोखिम कम होता है।

आज से 25 वर्ष पहले ज्यादातर बैंकिंग कार्य कागजों और मोटी फाइलों से किए जाते थे। जिसके कारण बैंक को कितने रुपए की धोखाधड़ी हुई है। पता करने में सालों लग जाते थे। परंतु मशीन लर्निंग जैसी टेक्नोलॉजी से बड़ी से बड़ी धोखाधड़ी को आसानी से पकड़ लिया जाता है।

4. Social Networks (सोशल नेटवर्क)

सोशल नेटवर्क प्लेटफॉर्म चाहे वह Facebook, Instagram, Pinterest और Snapchat ही क्यों ना हो। इन सभी प्लेटफार्म में Face Recognition तो होता ही है। जो अलग-अलग चेहरों के पैटर्न को समझता है और कौन सी पिक्चर किस व्यक्ति की है यह बताता है।

साथ ही यूजर्स के द्वारा अपनी पिक्चर को और ज्यादा बेहतर दिखाने के लिए कई Face Filters का उपयोग किया जाता है। जैसे Snapchat में इस्तेमाल होने वाले फिल्टर में मशीन लर्निंग एल्गोरिथम कार्य करते हैं। इसके अलावा किस कंटेंट को लेकर लोगों में ज्यादा रुचि है। वह कंटेंट ज्यादा बार लोगों के सामने Recommend किया जाता है।

साथ ही प्रत्येक यूज़र्स की अपनी रुचि होती है जिसे मशीन लर्निंग एल्गोरिथम Analyze करते हैं। उदाहरण: अगर आप उदास है तो आपको ज्यादातर उदासी भरे वीडियोस दिखाई देंगे। आपको म्यूजिक पसंद है तो म्यूजिक। हर सोशल नेटवर्क प्लेटफार्म में एल्गोरिदम इसी तरह काम करते हैं।

मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग में क्या अंतर है?

जिस प्रकार मशीन लर्निंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शाखा है। ठीक इसी प्रकार मशीन लर्निंग की भी शाखा है। जिसका नाम “डीप लर्निंग” है। आइए अब मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग के बीच अंतर को आसान भाषा में समझते हैं:

संख्यामशीन लर्निंग डीप लर्निंग
1. मशीन लर्निंग एल्गोरिथम का उपयोग कम डाटा को समझने और परिणाम देने में किया जाता है।डीप लर्निंग का उपयोग डाटा की बड़ी मात्रा को समझने और परिणाम पाने हेतु किया जाता है। जटिल डाटा को आसानी से डीप लर्निंग सीख सकते हैं।
2.मशीन लर्निंग मॉडल ज्यादातर Structured Data से कार्य शुरू करते हैं।डीप लर्निंग में Structure और Unstructured data दोनों तरह के डाटा से परिणाम प्राप्त किए जाते हैं।
3.मशीन लर्निंग में हैवी हार्डवेयर की जरूरत नहीं पड़ती इसके एल्गोरिदम डाटा को CPU से भी आसानी से प्रोसेस कर सकते है।डीप लर्निंग में ज्यादा डाटा प्रोसेस होने के कारण हैवी GPU हार्डवेयर की आवश्यकता पड़ती है।
4.मशीन लर्निंग डाटा से सीखने में कम समय लेती है और जल्दी आउटपुट देती है।डीप लर्निंग मशीन लर्निंग के मुकाबले ज्यादा मात्रा में डाटा को प्रोसेस करती है। जिसकी वजह से ज्यादा डाटा होने के कारण यह ज्यादा समय डाटा को ट्रेन करने में लेती है।
5.मशीन लर्निंग मॉडल एल्गोरिदम पर आधारित है।डीप लर्निंग एल्गोरिदम आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क पर आधारित है।

मशीन लर्निंग के क्या फ़ायदे है?

मशीन लर्निंग के फायदे इस प्रकार हैं:

  1. मशीन लर्निंग के द्वारा हर तरह के कार्य में Automation किया जा सकता है। जिसे मशीन ट्रेंड के हिसाब से प्राप्त डेटा के अनुसार सटीक परिणाम देती रहेगी।
  2. मशीन लर्निंग को लगभग हर कार्य के लिए तैयार किया जा सकता है। जिस भी बिजनेस या कार्य में मशीन लर्निंग मॉडल का उपयोग करना है। उस हिसाब से एल्गोरिदम का चुनाव किया जा सकता है।
  3. मशीन लर्निंग एल्गोरिथम इंसानों के काम को लगभग आधा कर देते हैं। साथ ही इंसानों के मुकाबले जल्दी और सटीक परिणाम देते हैं।
  4. मशीन समय अनुसार अपनी लर्निंग के आधार पर खुद को बेहतर बनाती जाती है। जिससे नया डाटा मिलने पर भी यह पहले से बेहतर कार्य करती है।
  5. एल्गोरिदम हर तरह के डाटा से आउटपुट दे सकते हैं और वह भी बहुत ही कम समय में चाहे वह वीडियो पिक्चर फाइल फॉरमैट ही क्यों न हो।
  6. मशीन लर्निंग शिक्षा के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद है। इसके उपयोग से हम आने वाली टेक्नोलॉजी के बारे में अच्छी तरह से समझ सकते हैं। उस पर अध्ययन कर सकते हैं।

मशीन लर्निंग के क्या नुक़सान है?

मशीन लर्निंग के नुक़सान इस प्रकार है:

  1. मशीन लर्निंग मॉडल को जितना ज्यादा डाटा मिलता जाता है। वह कम समय में अपनी लर्निंग पूरी करती है और इनपुट और आउटपुट परिणाम देती है ऐसे में High Error की संभावना बढ़ जाती है।
  2. अलग-अलग तरह के बिजनेस में अलग-अलग मशीन लर्निंग मॉडल तैयार किए जाते हैं। जिसमे उसी तरह का Input Data दिया जाता है। जो बिजनेस संबंधी है। ऐसे में कौन-सा एल्गोरिदम बिजनेस के लिए उपयुक्त होगा। उसका चुनाव करना भी एक समस्या है।
  3. मशीन लर्निंग AI का ही हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर AI का उपयोग रोबोट में किया जाए तो उनमें ऐसी क्षमता विकसित होगी। जिसे खुद चीजों को सोच समझ सकेंगे। learning मजबूत हो जाने से इंसानों के लिए खतरा बन सकती है।
  4. गूगल सर्च इंजन में करोड़ों-अरबों लोग सर्च करते हैं और हर दिन परिणाम दिखाई जाते हैं। जिसमें AI का उपयोग है। ठीक इसी प्रकार मशीन लर्निंग ज्यादा डाटा की ट्रेनिंग और टेस्टिंग करेगी तो ज्यादा CPU Power/GPU Power की आवश्यकता पढ़ती है।

मशीन लर्निंग के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ) :

मशीन लर्निंग कितनी प्रकार की होती है?

मशीन लर्निंग मुख्यतः चार प्रकार के होते है: 1. Supervised Learning 2. Un-Supervised Learning 3. Semi-Supervised Learning 4. Reinforcement Learning.

मशीन लर्निंग का आविष्कारक कौन है?

अमेरिकन कंप्यूटर साइंटिस्ट “Arthur Samuel” मशीन लर्निंग के आविष्कारक है।

मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में क्या अंतर है?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ऐसा इंटेलिजेंस है। जिसमें इसकी सभी शाखाओं का इस्तेमाल किया जाता है। जैसे मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग, रोबोटिक्स। जबकि मशीन लर्निंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शाखा है। जिसके आधार पर पूरा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कार्य करता है। किसी विषय को समझना, परिणाम देने जैसी क्षमता AI को मशीन लर्निंग ही देती है।

मशीन लर्निंग एल्गोरिथम्स क्या है?

किसी भी तरह के कार्य करने हेतु मशीन लर्निंग एल्गोरिथम का चुनाव किया जाता है। साथ ही ऐसे कई बिजनेस मॉडल होते हैं। जहां सभी एल्गोरिदम का उपयोग होता है। इन्हीं अलग-अलग एल्गोरिदम की बदौलत मशीन अपनी लर्निंग मजबूत करती जाती है।

मशीन लर्निंग क्या कर सकती है?

मशीन लर्निंग किसी भी बिजनेस किया कार्य में उपयोग की जा सकती है। हालांकि प्राप्त डाटा से यह अपनी लर्निंग मजबूत बनाती जाती है। इसलिए एल्गोरिदम को नया डाटा मिलता रहना चाहिए।

मशीन लर्निंग की आसान परिभाषा क्या है?

मशीन लर्निंग उन एल्गोरिदम पर आधारित है। जो प्राप्त डाटा से सीखती है। बिना किसी सेट प्रोग्रामिंग नियमों के।

निष्कर्ष:

आखिर में दोस्तों हमने अपनी पूरी कोशिश की कि आपको मशीन लर्निंग जैसे टॉपिक पर हिंदी में बिल्कुल सरल भाषा में सटीक जानकारी दी जाए। आपने यह आर्टिकल पूरा पढ़ा होगा तो अब सवाल आता है कि आखिर मशीन लर्निंग एल्गोरिथम की बदौलत अगर मशीन सभी चीजें कर सकती है। तो हम क्या करेंगे? देखिए बिल्कुल यह चिंता का विषय है क्योंकि टेक कंपनी से जैसे गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, फेसबुक आने वाले कुछ ही वर्षों में पूरी तरह से मशीनों से ही काम लेगी।

ऐसे में इन कंपनियो का मानना है कि इससे उनका रेवेन्यू भी बढ़ेगा। साथ ही इंजीनियर को हायर करने जैसी प्रक्रिया से निजात मिलेगी। परंतु ऐसे में कंप्यूटर साइंटिस्ट, डाटा साइंटिस्ट की बढ़ती मांग को नोटिस किया गया है। यानी उन कार्यों को ऑटोमेशन में लिया जाएगा। जिसे ह्यूमन करने में समय लेता है। जटिल टास्क को पूरा करने में मशीनों का उपयोग होगा।

तो वही जैसा कि आप जानते हैं कि विश्व के कई मशहूर लोगों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को खतरा बताया है। आप इसके बारे में क्या सोचते हैं? मशीन लर्निंग के बारे में आपकी क्या राय है? हमें जरूर बताएं। जिससे हम भविष्य में इस आर्टिकल को लोगों के लिए और भी ज्यादा सरल भाषा में लिख सके।

आपको हमारा लिखा मशीन लर्निंग क्या हैं? आर्टिकल कैसा लगा? हमे नीचे कमेंट करके अवश्य बताये। अगर इस आर्टिकल को लेकर आपका कोई सवाल है तो आप नीचे कमेंट करके ज़रूर पूछें। अपने दोस्तों में भी इसे शेयर अवश्य करें।

मेरा नाम Abhishek है। इस ब्लॉग का संस्थापक और लेखक हूं। मै Yoabby.com पर सभी आर्टिकल को हिंदी भाषा में लिखता हूं। मुझे लिखने का बहुत पहले से ही शौक था। ब्लॉगिंग के द्वारा मैं अपने शौक को भी पूरा कर रहा हूं। और साथ ही YoAbby.com पर आए लोगों को टेक्नोलॉजी के बारे में हिंदी भाषा में आर्टिकल उपलब्ध करवा रहा हूं।

Leave a Comment